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सर्वकोश
यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

यथार्थ गीता (श्रीमद्भगवद्गीता - स्वामी अड़गड़ानन्द)

Yatharth Geeta - Srimad Bhagavad Gita (Swami Adgadanand)

स्वामी अड़गड़ानन्द द्वारा

स्रोत: मानव धर्मशास्त्र - ५२०० वर्षों के अन्तराल के बाद श्रीमद्भगवद्गीता की शाश्वत व्याख्या · श्री परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्दजी आश्रम ट्रस्ट · 2015 (उद्गम)

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श्री हरि की वाणी
वीतराग परमहंसों का आधार
आदि शास्त्र गीता - संत मत
१०-२-२००७ - तृतीय विश्वहिन्दू सम्मेलन दिनांक १०-११-१२-१३ फरवरी २००७ के अवसर पर अर्धकुम्भ २००७ प्रयाग भारत में
प्रवासी एवं अप्रवासी भारतीयों के विश्व सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर विश्व हिन्दु परिषद ने ग्यारहवी
धर्मसंसद में पारीत गीता हमारा धर्मशास्त्र है प्रस्ताव के परिप्रेक्ष्य में गीता को सदैव से विद्यमान भारत का गुरुग्रन्थ
कहते हुए यथार्थ गीता को इसका शाश्वत भाष्य उद्घोषित किया तथा इसके अन्तर्राष्ट्रीय मानव धर्मशास्त्र की
उपयोगिता रखने वाला शास्त्र कहा ।
अशोक सिंहल
(अशोक सिंहल)
अन्तर्राष्ट्रीय अध्यक्ष - विश्व हिन्दू परिषद
॥ श्री काशीविश्वनाथो विजयते ॥ टे.नं. : २४५२१९३
ॐ मो. : ९४१५२८५८५६
सर्वतन्त्रस्वतन्त्र-शास्त्रार्थविद्यावतार-विश्वविश्रुत-महामहोपाध्यायादिविरुदविभूषक
पण्डितसम्राट्-प्रातःस्मरणीय श्री शिवकुमाराशास्त्रीभिरप्रतिष्ठापिता
वाराणसेयसर्वविद्वद्विद्वत्समाज-प्रतिनिधिभूता-
श्री काशीविद्वत्परिषद् पत्राचार कार्यालय :
डी. १७/५८, दशाश्वमेध,
वाराणसी, उत्तर प्रदेश,
भारत
दिनांक १.३.०४
१-३-२००५- भारत की सर्वोच्च श्री काशी विद्वत्परिषद ने दिनांक १-३-२००४ को “श्रीमद् भगवद् गीता” को आदि मनुस्मृति
तथा वेदों को इसी का विस्तार मानते हुए विश्वमानव का धर्मशास्त्र और यथार्थ गीता को परिभाषा के रूप में
स्वीकार किया और यह उद्घोषित किया कि धर्म और धर्मशास्त्र अपरिवर्तनशील होने से आदिकाल से धर्मशास्त्र
“श्रीमद् भगवद् गीता” ही रही है।
गणेशदत्त शास्त्री डा. केदार नाथ त्रिपाठी
गणेशदत्त शास्त्री आचार्य केदारनाथ त्रिपाठी दर्शनरत्नम वाचस्पति
मंत्री अध्यक्ष
श्री काशीविद्वत्परिषद श्री काशीविद्वत्परिषद
भारत भारत
विश्व धर्म संसद्
WORLD RELIGIOUS PARLIAMENT
३-१-२००१- विश्वधर्म संसद में विश्व मानव धर्मशास्त्र “श्रीमद् भगवद् गीता” के भाष्य यथार्थ गीता पर परम पूज्य परमहंस
स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज जी को प्रयाग के परमपावन पर्व महाकुम्भ के अवसर पर विश्वगुरु की
उपाधि से विभूषित किया ।
२-४-१९९८- मानवमात्र का धर्मशास्त्र “श्रीमद् भगवद् गीता” की विशुद्ध व्याख्या यथार्थ गीता के लिए धर्मसंसद द्वारा हरिद्वार
में महाकुम्भ के अवसर पर अन्तर्राष्ट्रीय अधिवेशन में परमपूज्य स्वामी श्री अड़गड़ानन्द जी महाराज को भारत
गौरव के सम्मान से विभूषित किया गया ।
१-४-१९९८- बीसवी शताब्दी के अन्तिम महाकुम्भ के अवसर पर हरिद्वार के समस्त शंकराचार्यों महामण्डलेश्वरो ब्राह्मण
महासभा और ४४ देशों के धर्मशील विद्वानों की उपस्थिति में विश्व धर्म संसद द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय अधिवेशन में
पूज्य स्वामी जी को “श्रीमद् भगवद् गीता” धर्मशास्त्र (भाष्य यथार्थ गीता) के द्वारा विश्व के विकास में अद्वितीय
योगदान हेतु “विश्वगौरव” सम्मान प्रदान किया गया ।
26-1-2001
Chairman Acharya Prabhakar Mishra
Presentation Committee महाकुम्भ प्रयाग Chairman (Indian Region)
or मेला World Religious Parliament
Presiding Authority WRP