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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 99, कुल 421 में से

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पृष्ठ 99

पूर्वार्ध आठवां अध्याय
हे अवभृथ ( स्नान यज्ञ ) ! आप निचोड़ने व निरंतर बहने वाले हैं. आप दैवकृपा
से देवों के प्रति हमारे पाप दूर करने की कृपा कीजिए. आप मनुष्यों के प्रति किए
गए हमारे पापों को दूर करने की कृपा कीजिए. आप परेशान करने वाले शत्रुओं
को दूर करने की कृपा कीजिए. आप की कृपा से देवत्व बढ़ता है. ( २७ )
एजतु दशमास्यो गर्भो जरायुणा सह.
यथायं वायुरेजाति यथा समुद्र ऽ एजति.
एवायं दशमास्यो अस्रज्जरायुणा सह.. ( २८)
दस माह के गर्भ के जरायु के साथ जाइए. जैसे यह वायु जाती है, जैसे यह
समुद्र जाता है, वैसे ही आप दस मास के जरायु के साथ उत्पन्न हुए. ( २८ )
यस्यै ते यज्ञियो गर्भो यस्यै योनिर्हिरण्ययी.
अङ्गान्यहुता यस्य तं मात्रा समजीगम १७ स्वाहा.. (२९)
हे देवी! इसी से आप का गर्भ यज्ञ से संबंधित भावनाएं रखने वाला है. आप
की योनि इसी से स्वर्गमयी है. अंग अग्नि की तरह पवित्र हैं. मंत्रों से आप का पवित्र
समागम होता है. आप के लिए यह आहुति समर्पित है. ( २९ )
पुरुदस्मो विषुरूप ऽ इत्दुरन्तर्महिमानमानञ्ज धीरः.
एकपदीं द्विपदीं त्रिपदीं चतुष्पदीमष्टापदीं भुवनानु प्रथन्ता १७ स्वाहा.. (३०)
गर्भ दानी रूपवान, बुद्धिमान, महिमावान और धीर है. एक पद वाली, दो पद
वाली, तीन पद वाली, चार पद वाली, आठ पद वाली, प्रार्थनाएं भुवनों में प्रसारित
हों. आप के लिए यह आहुति समर्पित है. ( ३० )
मरुतो यस्य हि क्षये पाथा दिवो विमहसः. स सुगोपातमो जनः.. (३१)
हे मरुद्गण! आप दिव्य व विशिष्ट हैं. आप लोगों के कष्ट दूर करते हैं. आप
लोगों की गायों के अच्छे रक्षक हैं. ( ३१ )
मही द्यौः पृथिवी च न ऽ इमं यज्ञं मिमिक्षताम्. पिपृतां नो भरीमभिः.. (३२)
महान् पृथ्वी, स्वर्गलोक इस यज्ञ की रक्षा करने की कृपा करें. धन पिपासुओं
( प्यासों ) को भरपूर धन प्रदान करने की कृपा कीजिए. ( ३२ )
आ तिष्ठ वृत्रहन्न्रथं युक्ता ते ब्रह्मणा हरी.
अर्वाचीन १७ सु ते मनो ग्रावा कृणोतु वग्नुना.
उपयामगृहीतोसीन्द्राय त्वा षोडशिन ऽ एष ते योनिरिन्द्राय त्वा षोडशिने.. (३३)
हे इंद्र देव! आप वृत्रनाशक हैं. आप के घोड़े संकेत मात्र से चलने वाले हैं.
आप अपने ब्रह्मज्ञानी घोड़ों को रथ में जोतिए. प्राचीन सोम को पत्थर से कूटने पर
यजुर्वेद - ९९