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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 8, कुल 421 में से

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पृष्ठ 8

विश्वावसु की प्रशंसा ३ ३९
अग्नि की प्रमुखता ४ ४०
देवताओं के लिए आसन ५ ४०
जुहू यज्ञस्थान आदि ६ ४०
अन्नदाता अग्नि की स्तुति ७-९ ४०-४१
इंद्र से धन देने का अनुरोध १० ४१
यज्ञ के रक्षक सविता देव की उपासना ११-१२ ४१
सविता और बृहस्पति की स्तुति १३ ४२
अग्नि की बढ़ोतरी के लिए समिधा १४-१६ ४२
अग्नि की परिधि १७ ४२-४३
अग्नि, इंद्र आदि देवगणों की वंदना १८-२८ ४३-४५
पितरों की स्तुति २९-३३ ४५
जलधाराओं से पितरों को तृप्त करने की प्रार्थना ३४ ४५
तीसरा अध्याय
यजमानों से निवेदन १-२ ४६
अग्नि की स्तुति ३-१९ ४६-४९
गायों की स्तुति २०-२२ ४९
अग्नि की स्तुति २३-२६ ४९-५०
इड़ा देवी के पधारने का आग्रह २७ ५०
ब्रह्मणस्पति देव की उपासना २८-३० ५०-५१
मित्र अर्यमन आदि देवों की स्तुति ३१-३३ ५१
इंद्र की स्तुति ३४ ५१
सविता देव से बुद्धि को प्रेरित करने का आग्रह ३५-३६ ५१
बहुरूपा अग्नि की स्तुति ३७-४० ५१-५२
गृह प्रवेश संबंधी मंत्र ४१-४३ ५२
मरुद्गणों की स्तुति ४४ ५२
पापों से मुक्त होने के लिए यज्ञ ४५ ५३
इंद्र की स्तुति ४६-४७ ५३
अवभृथ ( यज्ञ के अंत में ) स्नान संबंधी मंत्र ४८ ५३
दर्वि देवी की उपासना ४९ ५३
इंद्र यजमान संवाद ५० ५३
इंद्र की उपासना ५१-५२ ५४
पितरों से निवेदन ५३-५६ ५४
रुद्र की स्तुति ५७-६१ ५४-५५