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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 71, कुल 421 में से

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पृष्ठ 71

पूर्वार्ध पांचवां अध्याय
उशिगसि कविरङ्घारिरसि बम्भारिरवस्यूरसि दुवस्वाञ्छुन्ध्यूरसि मार्जालीयः
सम्राडसि कृशानुः परिषद्योसि पवमानो नभोसि प्रतकवा मृष्टोसि हव्यसूदन ऽ
ऋतधामसि स्वर्ज्योतिः.. (३२)
हे अग्नि! आप उशिक, कवि, शत्रुनाशक हैं. आप भरणपोषण कर्ता व अन्न
की कामना करने वाले हैं. आप शुद्ध व पावक हैं. आप सम्राट् हैं, कृशानु हैं. आप
सब ओर से यजमानों से घिरे हुए हैं. आप नभ व प्रदक्षिणा स्वरूप हैं. आप हवि को
पकाने वाले, सत्य के धाम एवं स्वयं प्रकाशक हैं. (३२)
समुद्रोसि विश्वव्यचा ऽ अजोस्येकपादहिरसि बुध्यो वागस्यैन्द्रमसि सदोस्युतस्य द्वारौ
मा मा सन्ताप्तमध्वनामध्वपते प्र मा तिर स्वस्ति मेस्मिन्पथि देवयाने भूयात्.. (३३)
आप समुद्र, सर्वज्ञाता व अजन्मा हैं. आप एक पैर वाले हैं. आप जागरूक हैं.
आप इंद्र से संबंधित हैं. आप वाणी स्वरूप हैं. आप हमारे घर में उपस्थित रहते हैं.
आप यज्ञ वेदी पर विराजमान हैं. आप यज्ञ द्वार पर स्थापित हैं. आप मार्ग पति हैं.
आप हमारा पथ प्रशस्त करने की कृपा करें. देवताओं के मार्ग हमारे लिए
कल्याणकारी होने की कृपा करें. (३३)
मित्रस्य मा चक्षुषेक्षध्वमग्नयः सगराः सगरास्थ सगरेण नाम्ना रौद्रेणानीकेन पात
माग्नयः पिपृत माग्नयो गोपायत मा नमो वोस्तु मा मा हि ꣳ षिष्ट.. (३४)
हे यज्ञ! आप हमें मित्रता की दृष्टि से देखने की कृपा करें. हे अग्नि! आप
हमारा पथ प्रदर्शन करने की कृपा करें. आप भयंकर से भयंकर शत्रुओं व भयंकर
सेना से हमारी रक्षा करने की कृपा करें. आप हमारा भरणपोषण करने की कृपा
करें. आप से हमारा कुछ भी छिपा हुआ नहीं है. आप को हमारा नमस्कार है. आप
किसी भी प्रकार की हिंसा न करें. (३४)
ज्योतिरसि विश्वरूपं विश्वेषां देवाना ꣳ समित्.
त्व ꣳ सोम तनूकृद्भ्यो द्वेषोभ्योअन्यकृतेभ्य ऽ उरु यन्तासि वरूथ ꣳ स्वाहा जुषाणो
अप्तुराज्यस्य वेतु स्वाहा.. (३५)
हे अग्नि! आप ज्योति व विश्व स्वरूप हैं. आप सब देवताओं की समिधा हैं.
आप सोम से शत्रुओं का नाश करते हैं. आप असत् कार्यों का नाश करते हैं. आप
हमें सुरक्षित स्थान पर ले जाने की कृपा कीजिए. आप बल संपन्न के लिए स्वाहा.
आप अनेक आहुतियों से संपन्न हैं. आप ज्ञाता हैं. आप के लिए स्वाहा. (३५)
अग्ने नय सुपथा राये अस्मान्विश्वानि देव वयुनानि विद्वान्.
युयोध्यस्मज्जुहुराणमेनो भूयिष्ठां ते नम उक्तिं विधेम.. (३६)
हे अग्नि! आप हमें सुपथ व धनमार्ग पर ले जाने की कृपा कीजिए. आप विद्वान्
यजुर्वेद - ७१