यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 412, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध अड़तीसवां अध्याय
चतुःस्रक्तिर्नाभिरृतस्य सप्रथाः स नो विश्वायुः सप्रथाः स नः सर्वायुः सप्रथाः.
अप द्वेषो अप ह्वरोऽन्यव्रतस्य सश्चिम.. (२०)
हे परम शक्ति! आप चारों दिशाओं में व्याप्त हैं. आप ऋत (सत्य) की नाभि
(केंद्र) हैं. आप यज्ञ की प्रथा के संचालक व विख्यात हैं. आप हमें पूर्णायु प्रदान करने
की कृपा कीजिए. आप हमें यशस्वी बनाइए व यश सहित सारी आयु प्रदान कीजिए.
आप हमें द्वेषियों (द्वेष करने वालों) से दूर कीजिए. आप हमें जन्ममरण के चक्र से
मुक्त कीजिए. आप संकल्पशील व कृपालु हैं. (२०)
घर्मैतत्ते पुरीषं तेन वर्धस्व चा च प्यायस्व.
वर्धिषीमहि च वयमा च प्यासिषीमहि.. (२१)
हे यज्ञ देव! आप क्षमतावान व समृद्धिवान हैं. आप की क्षमता और समृद्धि में
और भी बढ़ोतरी हो. हम भी आप की क्षमता और समृद्धि की बढ़ोतरी पाएं और
उस से आप्यायित (तृप्त) हो जाएं. (२१)
अचिक्रदद्वृषा हरिमर्महान्मित्रो न दर्शतः.
स सूर्य्येण द्युदुदधिर्निधिः.. (२२)
हे यज्ञ देव! आप निरंतर सुख बरसाने वाले, दुःखहारी, महान् मित्र व सर्वद्रष्टा
हैं. आप सूर्य की तरह द्युतिमान (प्रकाशमान) और उदधि (समुद्र) की तरह गहरे
(गंभीर) हैं. आप सुखों का खजाना हैं. (२२)
सुमित्रिया न ऽ आप ऽ ओषधयः सन्तु दुर्मित्रियास्तस्मै सन्तु योऽस्मान्द्वेष्टि यं च वयं
द्विष्मः.. (२३)
हे यज्ञ देव! जल व ओषधियां हमारे लिए मित्र के समान हों. जो हम से द्वेष
रखते हैं या जिन से हम द्वेष रखते हैं, उन के लिए जल और ओषधियां दुर्मित्र (बुरे
मित्र) की तरह हानिकर हो जाएं. (२३)
उद्वयं तमसस्परि स्वः पश्यन्त ऽ उत्तरम्.
देवं देवत्रा सूर्यमगन्म ज्योतिरुत्तमम्.. (२४)
हे यज्ञ देव! हम तमसलोक से भी अधिक ऊपर उठें. हम ऊर्ध्वलोक में सूर्य
जैसे देवों का भी कल्याण करने वाले देवों को देखें. हम श्रेष्ठ ज्योतिमान के
दर्शन करें. (२४)
एधोस्येधिषीमहि समिदसि तेजोसि तेजो मयि धेहि.. (२५)
हे यज्ञ देव! आप ज्योतिर्मय (प्रकाशमान) हैं. आप की ज्योति और भी फैले.
आप समिधा जैसे तेजस्वी हैं. आप की कृपा से हम भी उस तेज को धारण कर
सकें. (२५)
४१२ – यजुर्वेद