यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 395, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपैंतीसवां अध्याय
अपेतो यन्तु पणयोसुम्ना देवपीयवः. अस्य लोकः सुतावतः.
द्युभिरहोभिरक्तुभिर्व्यक्तं यमो ददात्ववसानमस्मै.. (१)
चोर व जो अच्छे मन वाले नहीं हैं, वे इस स्थान से दूर चले जाएं. देवताओं
के पीड़क इस स्थान से दूर चले जाएं. यह लोक हम देवपुत्रों का है. यम देव दिन
और रात में अभिव्यक्त इस उत्तम स्थान को हमारे लिए प्रदान करने की कृपा
करें. ( १ )
सविता ते शरीरेभ्यः पृथिव्याँल्लोकमिच्छतु. तस्मै युज्यन्तामुस्रियाः.. (२)
सविता देव आप के शरीर के लिए पृथ्वीलोक की इच्छा करने की कृपा करें.
वे पृथ्वीलोक को पशुओं से जोड़ने की कृपा करें. ( २ )
वायुः पुनातु सविता पुनात्वग्नेर्भ्राजसा सूर्यस्य वर्चसा. वि मुच्यन्तामुस्रियाः.. (३)
वायु देव व सविता देव इस स्थान को पवित्र बनाने की कृपा करें. सूर्य देव इस
स्थान को वर्चस्वी बनाने की कृपा करें. बंधे हुए गायों और बैलों को खोल दिया
जाए. ( ३ )
अश्वत्थे वो निषदनं पर्णे वो वसतिष्कृता.
गोभाज ऽ इत्किलासथ यत्सनवथ पूरुषम्.. (४)
पीपल और पलाश वृक्षों पर वास करने वाली ओषधियों से निवेदन है कि वे
यजमान को गायों को कांति से युक्त करने की कृपा करें. आप यजमान को पौरुष
युक्त करने की कृपा करें. ( ४ )
सविता ते शरीराणि मातुरुपस्थ ऽ आ वपतु. तस्मै पृथिवि शं भव.. (५)
सविता देव यजमान के शरीर को पृथ्वी माता की गोद में बैठाने की कृपा करें.
पृथ्वी माता का हम आह्वान करते हैं. वे उन सब के लिए सुखदायी तथा कल्याणकारी
हो. ( ५ )
प्रजापतौ त्वा देवतायामुपोदके लोके नि दधाम्यसौ. अप नः शोशुचदघम्.. (६)
यजुर्वेद - ३९५