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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 381, कुल 421 में से

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पृष्ठ 381

उत्तरार्ध तैंतीसवां अध्याय
जिस का ( इंद्र देव का ) सारा संसार दास है, सारे आर्य जिस के दास हैं,
उदारताहीन लोग उस के लिए दुश्मन हैं. इंद्र देव हमें आयुष्मान बनाने की कृपा करें.
वे हमें धनवैभव प्रदान करें, ताकि हम उस धन का उपभोग कर सकें. ( ८२ )
अय १७ सहस्रम्ऋषिभिः सहस्कृतः समुद्र ऽ इव प्रपथे.
सत्यः सो अस्य महिमा गृणे शवो यज्ञेषु विप्रराज्ये.. ( ८३ )
इंद्र देव को हजारों ऋषियों ने अपने स्तोत्रों से बलवान बनाया है. वे हजारों
कार्य करने में समर्थ हैं. वे समुद्र की भांति विस्तृत हैं. वे अतीव महिमावान व
गणमान्य हैं. यज्ञों में ब्राह्मणों के कहे अनुसार उन की महिमा का गुणगान किया
जाता है. ( ८३ )
अदब्धेभिः सवितः पायुभिष्व १७ शिवेभिरद्य परि पाहि नो गयम्.
हिरण्यजिह्वः सुविताय नव्यसे रक्षा माकिर्नो अघश १७ स ऽ ईशत.. ( ८४ )
हे सविता देव! आप सोने की जीभ वाले और कल्याणदायी हैं. आप हमारे
घरों की सब ओर से रक्षा करते हैं. आप हमारी रक्षा कीजिए. पापी हम पर
कब्जा न जमा सकें. हम आप को बारबार नमन करते हैं. ( ८४ )
आ नो यज्ञं दिविस्पृशं वायो याहि सुमन्मभिः.
अन्तः पवित्र ऽ उपरि श्रीणानोय १७ शुक्नो अयामि ते.. ( ८५ )
हे वायु! स्वर्गलोक तक छूने ( पहुंचने ) वाले हमारे इस यज्ञ में आप पधारने
की कृपा कीजिए. हम अच्छे मन वाले यजमान आप से आने का अनुरोध करते हैं.
सोम पवित्र, चमकीले व अत्यंत शोभादायक हैं. हम ऊपर से धरती पर आए इस
सोमरस को आप के पीने के लिए भेंट करते हैं. ( ८५ )
इन्द्रवायू सुसन्दृशा सुहवेह हवामहे.
यथा नः सर्व ऽ इज्जनोनमीवः सङ्गमे सुमना ऽ असत्.. ( ८६ )
हे इंद्र देव! हे वायु! आप अच्छी तरह से आह्वान के योग्य हैं. हम अच्छी तरह
आप का आह्वान करते हैं, जिस से हमारे सभी ( आत्मीय ) जन रोग रहित व श्रेष्ठ
मन वाले हो जाएं. ( ८६ )
ऋधगित्था स मर्त्यः शशमे देवतातये.
यो नूनं मित्रावरुणावभिष्टय ऽ आचक्रे हव्यदातये.. ( ८७ )
जो मनुष्य अपने सुख के लिए आप का आह्वान करते हैं, निश्चय ही जो मनुष्य
अपने अभीष्ट की पूर्ति के लिए मित्र देव और वरुण देव का आह्वान करते हैं, हवि
देने के लिए मनुष्य आप का आह्वान करते हैं. आप उन का अभीष्ट पूरा करने की
कृपा कीजिए. ( ८७ )
यजुर्वेद - ३८१