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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 37, कुल 421 में से

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पृष्ठ 37

पूर्वार्ध पहला अध्याय
देव सवितः परमस्यां पृथिव्या ᳪ शतेन पाशैर्योस्मान्द्वेष्टि यं च वयं द्विष्मस्तमतो
मा मौक्.. (२६)
हम ने दुष्ट अररु नामक शत्रु को पृथ्वी से दूर कर दिया है. मिट्टी को निकाल
कर जगह साफ कर दी है. अब उस मिट्टी से निवेदन करते हैं कि वह गायों के
बाड़े में जाए. स्वर्गलोक पृथ्वी पर पर्याप्त बरसात करने की कृपा करे. सविता
सिरजनहार हैं. वे हम से द्वेष करने वालों को सैकड़ों बंधनों से बांध दें और उन्हें
कभी मुक्त न करें. (२६)
गायत्रेण त्वा छन्दसा परिगृह्णामि त्रैष्टुभेन त्वा छन्दसा परिगृह्णामि.
जागतेन त्वा छन्दसा परिगृह्णामि.
सुक्ष्मा चासि शिवा चासि स्योना चासि सुषदा चास्यूर्जस्वती चासि पयस्वती
च.. (२७)
हे मनुष्यो! हम यज्ञवेदिका को गायत्री, त्रिष्टुप् और जगती छंदों वाली प्रार्थनाओं
से रचते हैं. यज्ञवेदिका दर्शनीय, कल्याणकारिणी, ऊर्जस्विनी व अमृतवती है. (२७)
पुरा क्रूरस्य विसृपो विरप्शिन्नुदादाय पृथिवीं जीवदानुम्.
यामैरयँश्चन्द्रमसि स्वधाभिस्तामु धीरासो अनुदिश्य यजन्ते.
प्रोक्षणीरासादय द्विषतो वधोसि.. (२८)
हे परमेश्वर! आप वीरों के और क्रूर युद्धों में वीर यजमानों के सर्वस्व हैं.
आप पृथ्वी पर जीवन दान व दानअनुदान की कृपा कीजिए. धीर पृथ्वी को
चंद्रमा की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से स्वधा (यज्ञ में दी जाने वाली
आहुति) के द्वारा यज्ञ करते हैं. हे याजको! आप यज्ञ में काम आने वाले साधनों
को अपने पास ले कर बैठिए. ईश्वर हम से द्वेष करने वालों का वध करने की
कृपा करें. (२८)
प्रत्युष्ट ᳪ रक्षः प्रत्युष्टा ऽ अरातयो निष्पप्त ᳪ रक्षो निष्पप्ता ऽ अरातयः.
अनिशितोसि सपत्नक्षिद्वाजिनं त्वा वाजेध्यायै सम्मार्ज्म.
प्रत्युष्ट ᳪ रक्षः प्रत्युष्टा ऽ अरातयो निष्पप्त रक्षो निष्पप्ता ऽ अरातयः.
अनिशितासि सपत्नक्षिद्वाजिनीं त्वा वाजेध्यायै सम्मार्ज्म.. (२९)
राक्षसों व शत्रुओं को नष्ट कर दिया गया है. हम पूर्णतया रक्षित हैं. अब
हमें पत्नी सहित यज्ञ करने के लिए प्रवृत्त होना चाहिए. हमारे साधन भले ही
उतने पैने नहीं हैं, परंतु उन्होंने राक्षसों और शत्रुओं को नष्ट कर दिया है. हमें
पूरी तरह सुरक्षित बना लिया है. हम पत्नी सहित अन्न व बल की प्राप्ति के
लिए यज्ञ करते हैं. हम अन्न व बल का ध्यान करते हुए आप को सम्मार्जित
करते हैं. (२९)
यजुर्वेद - ३७