यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 358, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध तीसवां अध्याय
समझने वाले की नियुक्ति करनी चाहिए. योग के लिए योगी को नियुक्त करना
चाहिए. शोक के लिए सांत्वना देने वाले को नियुक्त करना चाहिए. संरक्षण के लिए
मुक्ति दाता को नियुक्त करना चाहिए. उतारचढ़ाव हेतु ऊंचनीच में दक्ष को, शरीर हेतु
मनोनुकूल आचरण करने वाले को, शालीनता हेतु आंख शुद्ध करने वाले को,
नियुक्त किया जाना चाहिए. विपत्ति हेतु संचय नीति को यमनियम आदि हेतु असूया
(ईर्ष्या रहित) को नियुक्त किया जाना चाहिए. (१४)
यमाय यमसू॒मथ॑र्वभ्योवतो॒का थ्४ सं॑वत्स॒राय॑ पर्या॒यिणीं॑
प॒रि॒व॒त्स॒राया॑विजा॒तामि॒दाव॑त्सरायातीत्वरीमिद्वत्स॒राया॑तिष्क॒द्वरीं॑ वत्स॒राय विज॑र्जरा थ्४
सं॑वत्स॒राय॑ पलिक्री॒मृभुभ्यो॑जिनस॒न्ध थ्४ सा॒ध्येभ्य॑श्चर्म॒म्नम्.. (१५)
हे परमात्मा! यम के लिए नियम में समर्थ स्त्री को नियुक्त करना चाहिए.
अहिंसकों के लिए अवतोका नामक स्त्री को नियुक्त करना चाहिए. संवत्सर हेतु
समय की व्यवस्था जानने वाली की नियुक्ति की जानी चाहिए. परिवत्सर के लिए
कुंआरी को, इदावत्सर हेतु गतिशील को, अनुवत्सर हेतु ज्ञानवती को, वत्सर या
अनुवत्सर हेतु वृद्धा को, संवत्सर हेतु श्वेत बालों वाली वृद्धा को नियुक्त करना
चाहिए. ऋभु हेतु पराजित न होने वाले से मित्रता की जानी चाहिए. साध्य हेतु विशेष
धर्म ज्ञानी की नियुक्ति की जानी चाहिए. (१५)
स॒रोभ्यो॑ धैव॒रमुप॑स्थावरा॒भ्यो दाशं॑ वैशन्ता॒भ्यो वैन्दं॑ नड्वला॒भ्यः शौष्कलं॑ पारा॒य
मा॒र्गा॒रम॑वारा॒य कैव॒र्तं तीर्थेᳪभ्य ऽ आ॒न्दं वि॑षमे॒भ्यो मैनाल॑ थ्४ स्व॒नेभ्यः॑ पर्ण॒कं गुहा॑भ्यः
किरा॒तं थ्४ सानु॑भ्यो जम्भ॒कं पर्व॑तेभ्यः किम्पू॒रुषम्.. (१६)
तालाब हेतु मछुआरों को, उपवन हेतु सेवकों को, छोटे तालाब हेतु निषादों
को, नडवल हेतु मछली से जीविका निर्वाहक को नियुक्त किया जाना चाहिए. पार
जाने के लिए रास्ता जानने वाले को, उस पार से इस पार आने वाले के लिए केवट
को, तीर्थ के लिए बाड़ बांधने वाले को, असमान स्थान के लिए किनारा लगाने
वाले को नियुक्त करना चाहिए. मधुर ध्वनि के लिए तुरही वादक की, गुफाओं के
लिए भीलकिरात की, शिखर के लिए प्रचंड व्यक्ति की और पर्वत के लिए छोटे
पुरुषों की नियुक्ति की जानी चाहिए. (१६)
बी॒भ॒त्सायै॑ पौल्क॒सं वर्णा॑य हिरण्यका॒रं तु॒लायै॑ वाणि॒जं प॒श्चाद्दो॒षाय॑ ग्ला॒विनं॑ विश्वे॑भ्यो
भू॒तेभ्यः॑ सि॒ध्मलं॑ भू॒त्यै जा॒गर॑णमभू॒त्यै स्वप॑नमार्त्यै जनवा॒दिनं॑ व्यृद्ध्या ऽ अपग॒ल्भं थ्४
स थ्४ श॒राय॑ प्रच्छि॒दम्.. (१७)
बीभत्स (भयंकर/घृणित) कामों के लिए अनगढ़ (निर्दय) लोगों की
नियुक्ति की जानी चाहिए. अच्छे वर्ण के लिए सुनार, तौलने के लिए बनिए की
नियुक्ति करनी चाहिए. बाद में दोष देने के लिए नाराज व्यक्ति को, सभी प्राणियों
के लिए सिद्धिदायक व्यक्ति को नियुक्त करना चाहिए. समृद्धि हेतु जागरणशील
३५८ - यजुर्वेद