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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 346, कुल 421 में से

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पृष्ठ 346

उत्तरार्ध उनतीसवां अध्याय
यदक्रन्दः प्रथमं जायमान ऽ उद्यन्त्समुद्रादुत वा पुरीषात्.
श्येनस्य पक्षा हरिणस्य बाहू उपस्तुत्यं महि जातं ते अर्वन्.. (१२)
हे मेघ देव! आप की गति बाज पक्षी की गति जैसी है. आप हिरण बाहु की
तरह चंचल हैं. आप सर्वप्रथम उत्पन्न हुए. उत्पन्न होते ही आप ने क्रंदन किया. आप
समुद्र से उत्पन्न हुए. उत्पन्न होते ही आप स्तुत्य हो गए. आप की महिमा सर्वत्र व्याप्त
हो गई. ( १२ )
यमेन दत्तं त्रित एनमायुनगिन्द्र ऽ एणं प्रथमो अध्यतिष्ठत्.
गन्धर्वो अस्य रशनामगृह्णात् सूरादश्वं वसवो निरतष्ट.. (१३)
वायु देव ने यम के द्वारा दिए गए घोड़े को रथ में जोता. इंद्र देव सब से पहले
इस घोड़े पर बैठे. गंधर्व ने इस की लगाम ग्रहण की. वसुगणों ने इसे सूर्यमंडल से
निकाला. ( १३ )
असि यमो अस्यादित्यो अर्वन्नसि त्रितो गुह्येन व्रतेन.
असि सोमेन समया विपृक्त ऽ आहुस्ते त्रीणि दिवि बन्धनानि.. (१४)
हे मेघ देव! गुप्त व्रत के कारण आप यम हैं. गुप्त व्रत के कारण आप आदित्य
हैं. गुप्त व्रत के कारण आप तीनों लोकों में व्याप्त हैं. आप सोम के साथ एकमेक हैं.
स्वर्गलोक में आप के तीन बंधन बताए गए हैं. ( १४ )
त्रीणि त ऽ आहुर्दिवि बन्धनानि त्रीण्यप्सु त्रीण्यन्तः समुद्रे.
उतेव मे वरुणश्छन्त्स्यर्वन् यत्रा त ऽ आहुः परमं जनित्रम्.. (१५)
हे मेघ देव! स्वर्गलोक में तीन बंधन बताए गए हैं. तीन ही बंधन जल में बताए
गए हैं. तीन ही बंधन समुद्र में बताए गए हैं. उतने ही बंधन अंतरिक्ष में बताए गए हैं.
आप परम जनक हैं. हम वरुण रूप में आप की स्तुति करते हैं. ( १५ )
इमा ते वाजिन्नवमार्जनानीमा शफाना थ्ष सनितुर्निधाना.
अत्रा ते भद्रा रशना ऽ अपश्यममृतस्य या ऽ अभिरक्षन्ति गोपाः.. (१६)
हे बलवान मेघ देव! आप जिनजिन को सींचते हैं, हम उनउन को देखते हैं.
आप के खुरों के निशान हम ने देखे हैं. यहां आप की कल्याणकारी रस्सी है, जो
ग्वालों व अमरता की रक्षा करती है. ( १६ )
आत्मानं ते मनसारादजानामवो दिवा पतयन्तं पतङ्गम्.
शिरो अपश्यं पथिभिः सुगेभिररेणुभिर्जेहमानं पतत्रि.. (१७)
हम आप को मन से जानते हैं. स्वर्गलोक से नीचे की ओर गिरते हुए सूर्य को
जानते हैं. आप जब पथ से जाते हैं, तब आप के सिरे नीचे की ओर आते हैं. हम
उन सिरों को भी देखते हैं. आप सुगम हैं. ( १७ )
३४६ - यजुर्वेद