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सर्वकोश
यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)

Yajurveda Samhita with Hindi Translation

डा. रेखा व्यास द्वारा

स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished421 पृष्ठ

पृष्ठ 332, कुल 421 में से

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पृष्ठ 332

उत्तरार्ध सत्ताईसवां अध्याय
हे वायु! आप एक, दो, तीन, दस, बीस, तीस, तीन सौ और जितने चाहे, उतने
घोड़े जोत कर अपने रथ अभीष्ट कार्य के लिए छोड़िए. ( ३३ )
तव वायवृतस्पते त्वष्टुर्जामातरद्भुत. अवा ४४ स्या वृणीमहे.. (३४)
हे वायु! आप संकल्पशील, अद्भुत व त्वष्टा देव के जमाई हैं. हम आप के
रक्षा साधनों का वरण करते हैं. ( ३४ )
अभि त्वा शूर नोनुमोदुग्धा ऽ इव धेनवः.
ईशानमस्य जगतः स्वर्द्दशमीशानमिन्द्र तस्थुषः... (३५)
हे इंद्र देव! आप शूरवीर, संसार के स्वामी, सर्वद्रष्टा व ईश्वर हैं. बिना दुही हुई
गाय की तरह हम आप से धन पाना चाहते हैं. ( ३५ )
न त्वावाँ २ अन्यो दिव्यो न पार्थिवो न जातो न जनिष्यते.
अश्वायन्तो मघवन्निन्द्र वाजिनो गव्यन्तस्त्वा हवामहे.. (३६)
हे इंद्र देव! आप जैसा दिव्य कोई देव न कभी पृथ्वी पर पैदा हुआ है और न
ही होगा. आप धनवान हैं. आप हमें अश्वायित ( घोड़ों से युक्त ) कीजिए. आप हमें
बलशाली बनाइए. हम आप का आह्वान करते हैं. ( ३६ )
त्वामिद्धि हवामहे सातौ वाजस्य कारवः.
त्वां वृत्रेष्विन्द्र सत्पतिं नरस्त्वां काष्ठास्वर्वतः... (३७)
हे इंद्र देव! आप सत्पति व वृत्रनाशक हैं. याजक सर्वत्र विजय और अन्न बल
पाने के लिए आप का आह्वान करते हैं. ( ३७ )
स त्वं नश्चित्र वज्रहस्त धृष्णुया मह स्तवानो अद्रिवः.
गामश्व ४४ रथ्यमिन्द्र सं किर सत्रा वाजं न जिग्युषे.. (३८)
हे इंद्र देव! आप अद्भुत, वज्रधारी व पृथ्वी पर स्तुत्य हैं. आप हमें गोधन
और अश्वमय रथ दीजिए. आप हमें बलवान बनाइए, ताकि हम युद्धों में विजय
पा सकें. ( ३८ )
कया नश्चित्र ऽ आ भुवदूती सदावृधः सखा. कया शचिष्ठया वृता.. (३९)
हे इंद्र देव! आप हमारे सखा हैं. आप सदैव बढ़ोतरी पाते हैं. आप हमारी किस
पवित्र वृत्ति से प्रसन्न हो कर हम पर कृपा करते हैं. ( ३९ )
कस्त्वा सत्यो मदानां म ४४ हिष्ठो मत्सदन्धसः. दृढा चिदारुजे वसु.. (४०)
हे इंद्र देव! आप धनवान व सत्यवान हैं. कौन सी वस्तु आप को प्रिय है.
आनंददायी है, जिस से आप यजमानों पर धन बरसाते हैं ? ( ४० )
३३२ – यजुर्वेद