यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 277, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंउत्तरार्ध इक्कीसवां अध्याय
होता यक्षत् सुरेतसमृषभं नर्यापसं त्वष्टारमिन्द्रमश्विना भिषजं न सरस्वतीमोजो न
जूतिरिन्द्रियं वृको न रभसो भिषग् यशः सुरया भेषज १७ श्रिया न मासरं पयः सोमः
परिस्रुता घृतं मधु व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज.. (३८)
होता ने त्वष्टा देव के लिए यज्ञ किया. त्वष्टा देव अच्छे वीर्यवाले, बलवान व
परोपकारी हैं. होता ने देव वैद्य अश्विनी देवों के लिए यज्ञ किया. होता ने सरस्वती
देवी के लिए यज्ञ किया. होता ने चिकित्सा और इन सब देवताओं को प्रसन्न करने
के लिए यज्ञ किया. होता ने वृक, सुरा और मांड की ओषधि के रस से यज्ञ किया.
यह यज्ञ वैभवपूर्ण है. ओज, गति, बल तथा यश इंद्र देव में स्थापित किया. इस यज्ञ
में घी व दूध देवगण के लिए प्राप्त होते हैं. यजमान सब के कल्याण के लिए यज्ञ
करने की कृपा करे. (३८)
होता यक्षद्वनस्पति १४ शमितार १७ शतक्रतुं भीमं न मन्यु १४ राजानं व्याघ्रं नमसाश्विना
भाम १४ सरस्वती भिषगिन्द्राय दुह ऽ इन्द्रियं पयः सोमः परिस्रुता घृतं मधु व्यन्त्वाज्यस्य
होतर्यज.. (३९)
होता ने इंद्र देव, अश्विनी देव और देवी सरस्वती के लिए यज्ञ किया. ये देव
वनस्पति को शुद्ध करने वाले, सैकड़ों यज्ञ करने वाले, भीम, राजा, शेर के समान
गर्जना करने वाले हैं. उपयुक्त क्रोध वाले हैं. होता ने संस्कारयुक्त अन्न से इन देवों
की प्रसन्नता के लिए यज्ञ किया. सरस्वती ने इंद्र देव में क्रोध और बल को दुहा.
इस यज्ञ में देवों के लिए मधु, घी व दूध प्राप्त होते हैं. देवगण उन्हें ग्रहण करें. होता
सब का कल्याण करने की कृपा करें. (३९)
होता यक्षदग्नि १७ स्वाहाज्यस्य स्तोकाना १७ स्वाहा मेदसां पृथक् स्वाहा छागमश्विभ्या
१४ स्वाहा मेष १७ सरस्वत्यै स्वाहा ऋषभमिन्द्राय सिं १७ हाय सहस ऽ इन्द्रिय १४ स्वाहाग्निं
न भेषज १७ स्वाहा सोममिन्द्रिय १४ स्वाहेन्द्र १७ सुत्रामाण १७ सवितारं वरुणं भिषजां
पति १४ स्वाहा वनस्पतिं प्रियं पाथो न भेषज १७ स्वाहा देवा ऽ आज्यपा जुषाणो
अग्निर्भेषजं पयः सोमः परिस्रुता घृतं मधु व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज.. (४०)
होता ने अग्नि के लिए यज्ञ किया. अग्नि के लिए स्वाहा. स्तोत्रों के लिए स्वाहा.
मद के लिए अलग से स्वाहा. अश्विनीकुमारों के लिए स्वाहा. छाग के लिए स्वाहा.
देवी सरस्वती के लिए स्वाहा. मेष के लिए स्वाहा. इंद्र देव सिंह के समान
शक्तिशाली हैं. इंद्र देव के लिए स्वाहा. ऋषभ के लिए स्वाहा. सविता देव सुरक्षक
हैं, उन के लिए स्वाहा. वैद्य वरुण बलदायी है, उन के लिए स्वाहा. वनस्पति को
प्रिय अन्न से स्वाहा. देव वैद्य को प्रिय अन्न से स्वाहा. देवगणों के लिए मधु, घी व
दूध प्राप्त होते हैं. देवगण उन्हें स्वीकारने की कृपा करें. यजमानगण सब के लिए
यज्ञ करने की कृपा करें. (४०)
यजुर्वेद - २७७