यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
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संदर्भ में पढ़ेंब्राह्मणों की स्तुति २२ २८८
विभिन्न देवों एवं कर्मों के लिए स्वाहा २३-३४ २८८-२९१
तेईसवां अध्याय
परमात्मा की उत्पत्ति १ २९२
परमात्मा और प्रजापति के लिए हवि का विधान २-४ २९२-२९३
यज्ञ के साधनों का संयोजन ५ २९३
यज्ञ रूपी अश्व ६-८ २९३
ब्रह्मा होता संवाद ९-१२ २९३-२९४
अग्नि को नमन १३ २९४
यज्ञ रूपी रथ की प्रशंसा १४ २९४
यज्ञ ऊर्जा की महिमा १५ २९४-२९५
परम शक्ति की अनश्वरता १६ २९५
विजय के लिए ऊर्जा १७ २९५
अंबा की स्तुति १८ २९५
गणपति का आह्वान १९ २९५-२९६
यज्ञ शक्ति और देव शक्ति २० २९६
दुष्टों का दमन करने वाली परम शक्ति २१ २९६
शक्तिशाली जल २२ २९६
यज्ञ के बारे में निरर्थक बातें न करें २३ २९६
पूर्वजों की प्रसन्नता २४ २९६
कम बोलने की सलाह २५ २९६
राष्ट्र के लिए प्रजापति से प्रार्थना २६-२७ २९७
पाप भेदक यज्ञाग्नि २८ २९७
परमानंददायी गतिविधियां २९ २९७
अपनी हानि से दुःख ३०-३१ २९७-२९८
यज्ञ देव की कृपा ३२ २९८
यज्ञाग्नि की शांति ३३-३७ २९८-२९९
सोम का आह्वान ३८ २९९
सुखदाता परमात्मा की वंदना ३९-४४ २९९-३००
ब्रह्मा होता संवाद ४५-४८ ३००
विष्णु के तीन पैर ४९-५० ३००-३०१
पंचमहाभूतों में परम पुरुष का रमण ५१-५२ ३०१
ब्रह्मा होता संवाद ५३-६५ ३०१-३०३