यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 195, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंसोलहवां अध्याय
नमस्ते रुद्र मन्यव ऽ उतो त ऽ इषवे नमः. बाहुभ्यामुत ते नमः.. (१)
रुद्र देव के लिए नमस्कार. आप के क्रोध को नमन. आप के बाणों के लिए
नमस्कार. आप के दोनों बाहुओं के लिए नमस्कार. ( १ )
या ते रुद्र शिवा तनूरघोरा ऽ पापकाशिनी.
तया नस्तन्वा शन्तमया गिरिशन्ताभि चाकशीहि.. (२)
रुद्र देव कल्याणकारी, घोर पापों के भी नाशक, शांत व बलवान हैं. रुद्रदेव
हम पर कल्याणकारी कृपा दृष्टि रखें. ( २ )
यामिषुं गिरिशन्त हस्ते बिभर्ष्यस्तवे.
शिवां गिरित्र तां कुरु मा हि ꣳ सीः पुरुषं जगत्.. (३)
आप गिरिवासी हैं. आप के हाथ में हमारा भविष्य है. आप अपनी कल्याणकारी
शक्ति से हमारा त्राण ( कल्याण ) कीजिए. आप हिंसा मत कीजिए. आप जगत् और
मनुष्यों के प्रति हिंसा मत कीजिए. ( ३ )
शिवेन वचसा त्वा गिरिशाच्छावदामसि.
यथा नः सर्वमिज्जगदयक्ष्म ꣳ सुमना ऽ असत्.. (४)
हे रुद्र देव! आप पर्वतवासी हैं. हम आप के प्रति कल्याणकारी वचन बोलते
हैं. आप इस सारे जग को यक्ष्मा ( रोग ) से दूर रखने की कृपा कीजिए. हम आप
की कृपा से अच्छे मन वाले हो जाएं. ( ४ )
अध्यवोचदधिवक्ता प्रथमो दैव्यो भिषक्.
अहीँश्च सर्वाञ्जम्भयन्त्सर्वाश्च यातुधान्यो ऽ धराचीः परा सुव.. (५)
रुद्र देव अधिवक्ता, प्रथम देव व वैद्य आप सभी हिंसक प्राणियों व नीच
प्रवृत्ति वालों को नष्ट करने की कृपा कीजिए. ( ५ )
असौ यस्ताम्रो अरुण ऽ उत बभ्रुः सुमङ्गलः.
ये चैन ꣳ रुद्रा ऽ अभितो दिक्षु श्रिताः सहस्रशो ऽ वैषा ꣳ हेड ऽ ईमहे.. (६)
यजुर्वेद - १९५