यजुर्वेद संहिता (सरल हिन्दी भावार्थ सहित)
Yajurveda Samhita with Hindi Translation
डा. रेखा व्यास द्वारा
स्रोत: संस्कृत साहित्य प्रकाशन · संस्कृत साहित्य प्रकाशन (उद्गम)
पृष्ठ 121, कुल 421 में से
संदर्भ में पढ़ेंपूर्वार्ध दसवां अध्याय
अभिषेक के समय बलवान सोम की धाराएं पर्वत की पीठ से बहने वाली
जलधाराओं की तरह बहती हैं. जैसे जलधारा पर्वत को ढक कर के बहती है, वैसे
ही सोम की धाराएं धन वैभव के पर्वत को ढक कर के बहती हैं. वैसे ही पृथ्वी
विष्णु के प्रथम चरण में जीती गई. अंतरिक्ष विष्णु के द्वितीय चरण में जीता गया.
स्वर्गलोक विष्णु के तृतीय चरण में जीता गया. ( १९ )
प्रजापते न त्वदेतान्यन्यो विश्वा रूपाणि परि ता बभूव.
यत्कामास्ते जुहुमस्तन्नो अस्त्वयममुष्य पितासावस्य पिता वय ᳪ स्याम पतयो रयीणा
ᳪ स्वाहा.
रुद्र यत्ते क्रिवि परं नाम तस्मिन्हुतमस्यमेष्टमसि स्वाहा.. (२०)
हे प्रजापति! इस विश्व में आप के अलावा हमारा अन्य कोई नहीं हैं. आप
ही विश्वरूप हैं. हम जिस कामना से यज्ञ करते हैं, आप हमारी उन कामनाओं
को परिपूर्ण करने की कृपा कीजिए. यह अमुक का पिता है, हम अमुक के पिता
हैं. हम धनों के स्वामी हो जाएं. आप के लिए स्वाहा. रुद्र देव के भीषण व
कल्याणकारी रूप के लिए स्वाहा. ( २० )
इन्द्रस्य वज्रोसि मित्रावरुणयोस्त्वा प्रशास्त्रोः प्रशिषा युनज्मि.
अव्यथायै त्वा स्वधायै त्वारिष्टो अर्जुनो मरुतां प्रसवेन जयापाम मनसा
समिन्द्रियेण.. (२१)
आप इंद्र देव के वज्र हैं. मित्र और वरुण देव आप के अस्त्रशस्त्र हैं. हम आप
को ( शत्रुनाश हेतु ) नियुक्त करते हैं. आप के लिए स्वाहा. शत्रुनाशक हेतु
स्वाहा. अर्जुन हेतु स्वाहा. मरुतों के लिए स्वाहा. हम मन व इंद्रियों से आप के
साथ हैं. ( २१ )
मा त ऽ इन्द्र ते वयं तुराषाडयुक्तसो अब्रह्मता विदसाम.
तिष्ठा रथमधि यं वज्रहस्ता रश्मीन् देव यमसे स्वश्वान्.. (२२)
हे इंद्र देव! हम सब आप की कृपा से ज्ञानी हो जाएं. हम सब आप की कृपा
से ब्रह्मज्ञानी हो जाएं. हम सब आप की कृपा से ज्ञाता हो जाएं. जैसे रथ में बैठ कर
प्रशिक्षित घोड़ों की लगाम थाम ली जाती है, वैसे ही वज्र हाथ वाले आप यमराज
से हमारे प्राण के घोड़ों की लगाम थामिए. ( २२ )
अग्नये गृहपतये स्वाहा सोमाय वनस्पतये स्वाहा मरुतामोजसे स्वाहेन्द्रस्येन्द्रियाय स्वाहा.
पृथिवि मातर्मा मा हि ᳪ सीर्मो अहं त्वाम्.. (२३)
गृहपति अग्नि के लिए स्वाहा. वनस्पति सोम के लिए स्वाहा. ओजस्वी मरुद्
देव के लिए स्वाहा. इंद्रिय सामर्थ्यदाता इंद्र देव के लिए स्वाहा. हे पृथ्वी माता! हम
आप के प्रति हिंसा न करें. हे पृथ्वी माता! आप हमारे प्रति हिंसा न करें. ( २३ )
यजुर्वेद - १२१