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याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

याज्ञवल्क्य स्मृति (मिताक्षरा टीका व हिन्दी व्याख्या सहित)

Yajnavalkya Smriti with Mitakshara Tika & Hindi Commentary

महर्षि याज्ञवल्क्य द्वारा

स्रोत: चौखम्बा संस्कृत संस्थान · चौखम्बा संस्कृत संस्थान (उद्गम)

DevanagariSanskritpublished782 पृष्ठ

पृष्ठ 42, कुल 782 में से

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पृष्ठ 42

विषयानुक्रम
( टीका में विवेचित महत्त्वपूर्ण विषयों का भी निर्देश इस
विषयानुक्रम में किया गया है )
१. आचाराध्याय
( १ ) उपोद्घातप्रकरण
मुनियों की जिज्ञासा - १
छः प्रकार का स्मार्त धर्म - २
धर्म के चौदह स्थान - ३
धर्मशास्त्रकार ऋषि - ”
धर्म के कारक हेतु - ४
धर्म के ज्ञापक हेतु - ”
देश आदि कारक हेतुओं का अपवाद - ५
हेतुविषयक सन्देह का निर्णय - ”
( २ ) ब्रह्मचारिप्रकरण
वर्ण - ५
गर्भाधान आदि संस्कार - ६
संस्कार करने का फल - ७
स्त्रियों के संस्कार - ”
उपनयन का समय - ”
गुरु के धर्म - ”
शौच के नियम - ८
प्राजापत्य आदि तीर्थ - ९
आचमन की विधि - ”
प्राणायाम - १०
सावित्रीजप की विधि - ”
अग्निकार्य - ११
अभिवादन की विधि - ”
अध्यापन के योग्य व्यक्ति - ”
दण्ड इत्यादि का धारण - १२
भिक्षाचरण की विधि - ”
भोजन का नियम - १३
ब्रह्मचारी के लिए निषिद्ध कर्म - १३
गुरु, आचार्य आदि के लक्षण - १४
उपाध्याय, ऋत्विक् के लक्षण - ”
ब्रह्मचर्य की अवधि - ”
उपनयन की समयसीमा - १५
द्विजत्व का कारण - ”
वेदाध्ययन का फल - १६
काम्यब्रह्मयज्ञाध्ययन का फल - ”
पञ्चमहायज्ञ का फल - १७
नैष्ठिक ब्रह्मचारी के धर्म - १८
( ३ ) विवाहप्रकरण
गुरुदक्षिणा के पूर्व का स्नान - १८
कन्या के लक्षण - २०
सपिण्ड का विचार - २१
कन्यावरण का नियम - २२
कन्यादान में वर के नियम - ”
द्विजातियों के लिए शूद्रा से विवाह का निषेध - २३
अनुलोमविवाह - ”
आठ प्रकार के विवाह - २४
सवर्णा से विवाह में विशेषता - २५
कन्यादान देने वाले - ”
कन्याहरण का दण्ड - २६
कन्या के दोष का गोपन - ”
नियोग की विधि - २७
व्यभिचारिणी के लिए दण्ड - २८
स्त्रियों की पवित्रता - ”
दूसरे विवाह के हेतु - २९