सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 96, कुल 350 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 96

( ९५ )
अलग-अलग हाथों में यह रेखा अलग-अलग लम्बाई लिये हुई होती है। किसी
हाथ में यह रेखा तर्जनी तक किसी हाथ में मध्यमा तक तो किसी हाथ में अनामिका
तक ही जाकर समाप्त हो जाती है परन्तु मैंने कुछ हाथों में यह रेखा गुरु क्षेत्र को
पार कर हथेली के दूसरे छोर तक पहुंचती हुई भी देखी है, परन्तु ऐसी लम्बी रेखा
बहुत कम लोगों के हाथों में ही होती है ।
४. सूर्य रेखा :—अंग्रेजी में इसे 'अपोलो लाइन' या 'सन लाइन' अथवा
'लाइन आफ सक्सेस' भी कहते हैं। हिन्दी में इस रेखा को
सूर्य रेखा, रवि रेखा अथवा प्रतिभा रेखा कहते हैं। इस रेखा
का उद्गम विभिन्न व्यक्तियों के हाथों में विभिन्न स्थानों से
देखा गया है, परन्तु एक बात सभी व्यक्तियों के हाथों में
समान होती है वह यह कि इस रेखा की समाप्ति सूर्य पर्वत
पर जाकर होती है। मैंने लगभग इस रेखा का प्रारम्भ तीस
स्थानों से देखा है। अतः रवि रेखा या सूर्य रेखा उसी रेखा
को माननी चाहिए जिसकी समाप्ति सूर्य पर्वत पर होती हो ।
सूर्य रेखा
५. भाग्य रेखा :—इसे अंग्रेजी में 'फेट लाइन' कहते हैं। हिन्दी में इसे भाग्य
रेखा ऊर्ध्व रेखा अथवा प्रारब्ध रेखा भी कहते हैं ।
भाग्य रेखा भाग्य रेखा
यह रेखा सभी व्यक्तियों के हाथों में दिखाई नहीं देती। साथ ही इस रेखा
के उद्गम भी कई होते हैं परन्तु एक बात भली प्रकार से समझ लेनी चाहिए कि
जिस रेखा की समाप्ति शनि पर्वत पर होती है वही रेखा भाग्य रेखा कहला सकती है।