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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 93, कुल 350 में से

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पृष्ठ 93

( ६२ )
रेखाओं के उद्गम स्थान :
पीछे की पंक्तियों में मैंने रेखाओं के बारे में साधारण जानकारी दी है परन्तु
हमें यह भी ज्ञात करना चाहिए कि इन रेखाओं का वास्तविक उद्गम स्थान कौन-सा
होता है।
१. जीवन रेखा :—इसे अंग्रेजी में 'लाइफ लाइन' कहते हैं हिन्दी में कुछ
विद्वान इसे पितृ रेखा या आयु रेखा के नाम से भी सम्बोधित करते हैं पूरी हथेली
में इस रेखा का महत्त्व सबसे अधिक है, क्योंकि यदि जीवन है तो सब कुछ है
जिस दिन जीवन ही समाप्त हो जायगा उस दिन बाकी रेखाओं का प्रभाव भी व्यर्थ
हो जायगा।
जीवन रेखा जीवन रेखा
जीवन रेखा बृहस्पति पर्वत के नीचे हथेली की बगल से उठ कर तर्जनी और
अंगूठे के बीच में से प्रारंभ होकर शुक्र पर्वत को घेरती हुई मणिबन्ध पर जाकर विश्राम
करती है संसार में जितने भी प्राणी हैं उन सब के हाथों में यह रेखा यहीं पर दिखाई
देती हैं इसी रेखा से व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य, बीमारी, स्वस्थता आदि की जानकारी
अथवा ज्ञान प्राप्त होता है।
सभी व्यक्तियों के हाथों में यह रेखा एक-सी दिखाई नहीं देती कुछ लोगों के
हाथों में यह रेखा गहरी और लम्बी होती है तो कुछ रेखाएं व्यक्ति के शुक्र पर्वत
को बहुत संकीर्ण बना लेती हैं किसी-किसी व्यक्ति के हाथ में यह रेखा शुक्र पर्वत के
पास में जाकर टूट-सी जाती है ऐसे व्यक्ति निश्चय ही कम आयु के होते हैं तथा उनकी
मृत्यु दुर्घटना से होती है।
इस रेखा से व्यक्ति के सम्पूर्ण जीवन के बारे में साधारणतः जाना जा
सकता है।