बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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सूर्य का चिन्ह : विशेष सफलता ।
चन्द्र का चिन्ह : तटवर्ती स्थानों पर व्यापार से लाभ ।
मंगल का चिन्ह : युद्ध शस्त्र, के व्यापार से सफलता ।
बुध का चिन्ह : अन्तर्राष्ट्रीय व्यापारी ।
गुरु का चिन्ह : सफल सामाजिक भावना का विकास ।
शुक्र का चिन्ह : सो से अधिक स्त्रियों से रमण ।
शनि का चिन्ह : नपुंसकता ।
११. प्लूटो :
एक रेखा : जीवन में पूर्ण उन्नति ।
कई रेखाएं : समाज में विशेष सम्मान ।
आपस में कटती हुई रेखाएं : सन्यास भावना का विकास ।
बिन्दु : हर कार्य में असफलता ।
क्रॉस : आत्महत्या
नक्षत्र : धार्मिक कार्यों में रुचि ।
वर्ग : मूर्खता ।
वृत्त : शुभ कार्यों में रुचि ।
त्रिकोण : कई कलाओं में सफलता ।
जाली : असफल जीवन ।
सूर्य का चिन्ह : विशेष सम्मान ।
चन्द्र का चिन्ह : जल में डूबने से मृत्यु ।
मंगल का चिन्ह : धर्मान्धता ।
बुध का चिन्ह : व्यापारिक कार्यों में विशेष सफलता ।
गुरु का चिन्ह : समाज में सम्मानीय स्थान प्राप्त होना ।
शुक्र का चिन्ह : सात्विक प्रेम ।
शनि का चिन्ह : तंत्र विद्याओं में रुचि ।
संक्षेप में आगे की पंक्तियों में ऋणात्मक और घनात्मक पर्वत का विवेचन
कर रहा हूं । जिन तारीखो में जन्म होता है उन तारीखों के अनुसार उसके पर्वत का
फल उसके जीवन में रहता है । घनात्मक पर्वत होने पर उस पर्वत की विशेषताएं
तथा ऋणात्मक पर्वत होने पर उस पर्वत से सम्बन्धित ग्रह की न्यूनताएं मिलती हैं ।