बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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५. शुक्र :
शुक्र और चन्द्र : प्रेमभावना की तीव्रता तथा कला प्रेम ।
शुक्र और राहू : निम्न स्तर की स्त्रियों से सम्बन्ध ।
शुक्र और केतु : सहृदयता एवं उच्च भावना का विकास ।
शुक्र और हर्षल : प्रेम में तीव्रता ।
शुक्र और नेपच्यून : उच्च कोटि का कला प्रेम और मनुष्य मात्र के प्रति
स्नेह ।
शुक्र और प्लूटो : जीवन की बाधाओं को समझने वाला और उन बाधाओं को
परास्त करने वाला ।
शुक्र और मंगल : संगीत ज्ञान में पूर्णता ।
६. चन्द्र :
चन्द्र और मंगल : समुद्रपारीय यात्रा ।
चन्द्र और राहू : मित्रों द्वारा विश्वासघात ।
चन्द्र और केतु : यौवनावस्था में प्रेम के द्वारा बदनामी ।
चन्द्र और हर्षल : मानवीय भावनाओं का विकास ।
चन्द्र और नेपच्यून : वैरागी भावना ।
चन्द्र और प्लूटो : प्रबल काम-शक्ति ।
७. राहू :
राहू और केतु : आजीविका के लिए कठोर प्रयत्न ।
राहू और हर्षल : दुखमय जीवन ।
राहू और नेपच्यून : विदेश में रहने वाली स्त्री से विवाह ।
राहू और प्लूटो : अपराधवृत्ति का विकास ।
८. केतु :
केतु और हर्षल : अत्याचार की भावना ।
केतु और नेपच्यून : ज्ञान शून्यता ।
केतु और प्लूटो : सम्मान वृद्धि ।
६. हर्षल :
हर्षल और प्लूटो : वैज्ञानिक प्रतिभा का विकास ।