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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 72, कुल 350 में से

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पृष्ठ 72

( ७१ )
ऐसे व्यक्ति महत्त्वाकांक्षी होते हैं और अपना लक्ष्य इन्हें बराबर ध्यान में रहता
है। जीवन में ये अपने लक्ष्य की ओर बराबर बढ़ते रहते हैं। यदि ये व्यापार के क्षेत्र
में प्रवेश करें तो मेडिकल आदि में विशेष सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
यदि मंगल पर्वत उभरा हुआ हो और हाथ की उंगलियां कोणदार हों तो
व्यक्ति आदर्श-प्रिय होता है। वर्गाकार उंगलियां इस बात की सूचक होती हैं कि वे
व्यक्ति व्यावहारिक तथा जीवन में फूंक-फूंक कर कदम रखने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति
चतुर और चालाक होते हैं तथा अपने हितों की ओर विशेष ध्यान रखते हैं। यदि
उंगलियां गठीली हों तथा मंगल पर्वत उन्नत हो तो व्यक्ति तर्क करने वाला तथा
अपने जीवन में सोच-समझ कर कार्य करने वाला होता है। यदि मंगल पर्वत पर
क्रॉस का चिह्न दिखाई दे तो उस व्यक्ति की मृत्यु निश्चय ही युद्ध में या चाकू लगने
से होती है। यदि मंगल पर्वत पर आड़ी-तिरछी रेखाएं हों और उससे जाल-सा बन
गया हो तो निश्चय ही उसकी मृत्यु दुर्घटना के फलस्वरूप होती है।
वस्तुतः मंगल पर्वत से ही व्यक्ति साहसी, निर्भीक, और स्पष्ट वक्ता बनता
है।
७. चन्द्र : चन्द्रमा मनुष्य का सबसे अधिक निकटतम ग्रह है। इसलिए इसका
प्रभाव भी मनुष्य पर सबसे अधिक पड़ता है। सही रूप में यह ग्रह 'सुन्दरता और
कल्पना' का ग्रह कहा जाता है।
हथेली में आयु रेखा से बायीं ओर तथा मणिबन्ध से ऊपर एवं नेपच्युन क्षेत्र से
नीचे भाग्य रेखा से मिला हुआ जो क्षेत्र है, वह चन्द्र क्षेत्र अथवा चन्द्र पर्वत कहलाता
है। जिन व्यक्तियों के हाथों में चन्द्र पर्वत विकसित होता है, वे व्यक्ति कोमल, रसिक
एवं भावुक होते हैं।
जिनके हाथों में चन्द्र-पर्वत पूर्णतः उभरा हुआ होता है वे प्रकृति-प्रिय एवं
सौन्दर्यप्रिय होते हैं। ऐसे लोग वास्तविक जीवन से हट कर स्वप्नलोक में ही विचरण
करते हैं। इनके जीवन में कल्पनाओं का कोई अभाव नहीं रहता। एक प्रकार से ये
व्यक्ति अपने आप में ही खोये हुए होते हैं। जीवन की कठोरताओं को तथा मुसीबतों
को ये झेल नहीं पाते और थोड़ी-सी भी परेशानी आने पर ये विचलित हो जाते हैं।
ऐसे व्यक्ति संसार के छल-कपट से दूर तथा एक शान्त और कल्पनामय जग
में विचरण करने वाले कहे जाते हैं। ऐसे ही व्यक्ति उत्तम कोटि के कलाकार, संगीतज्ञ
और साहित्यकार होते हैं। इनके विचारों में धार्मिकता विशेष रूप में होती है, किसी के
दबाव में ये कार्य नहीं कर पाते। इनके विचार स्वतंत्र एवं स्पष्ट होते हैं।
जिनके हाथों में चन्द्र-पर्वत का अभाव होता है, वे व्यक्ति कठोर हृदय एवं पूर्ण
भौतिक वादी होते हैं। जिनके जीवन में युद्ध ही प्रधान होता है उनके हाथों में चन्द्र
पर्वत का अभाव स्पष्ट देखा जा सकता है।