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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 67, कुल 350 में से

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पृष्ठ 67

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होता है। ऐसे व्यक्ति सभा वगैरह में लोगों को प्रभावित करने की विशेष क्षमता रखते
हैं । इनका आदर बहुत ऊंचा होता है ।
यदि यह पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित हो तो वह व्यक्ति अत्यधिक घमण्ड
करने वाला तथा झूठी प्रशंसा करने वाला होता है। ऐसे व्यक्तियों के मित्र सामान्य
स्तर के लोग होते हैं। ये फिजूल खर्च तथा बात बात पर झगड़ने वाले होते हैं। ऐसे
व्यक्ति अपने जीवन में पूर्ण सफलता प्राप्त नहीं कर पाते ।
यदि सूर्य पर्वत शनि की ओर झुका हुआ हो तो ऐसे व्यक्ति एकान्त-प्रिय तथा
निराशावादी भावनाओं से ग्रस्त रहते हैं। इनके जीवन में धन की कमी हमेशा बनी
रहती है। किसी भी कार्य को ये पूर्ण जोश से प्रारम्भ करते हैं, परन्तु जितनी उमंग
और जोश से ये कार्य प्रारंभ करते हैं उसी उमंग से उस कार्य को पूरा नहीं कर पाते ।
कार्य को बीच में ही अधूरा छोड़कर किसी नये कार्य की ओर लग जाते हैं। वस्तुतः
शनि की ओर झुका हुआ पर्वत भाग्यहीनता का सूचक होता है।
यदि यह पर्वत बुध की ओर झुका हुआ हो तो व्यक्ति एक सफल व्यापारी
तथा श्रेष्ठ धनवान होता है। ऐसे व्यक्ति समाज में सम्माननीय स्थान प्राप्त करने में
सफल होते हैं।
यदि सूर्य की उंगली बेडौल होती है तो वह सूर्य के गुणों में न्यूनता ला
देती है। ऐसे व्यक्ति में बदले की भावना बढ़ जाती है तथा लोगों से व्यवहार करते
समय वह सावधानी नहीं बरतता, यदि सूर्य पर्वत पर जरूरत से ज्यादा रेखाएं हों
तो वह व्यक्ति बीमार रहता है। यदि सूर्य उंगली का सिरा कोणदार हो तथा पर्वत
उभरा हुआ हो तो वह व्यक्ति कला के क्षेत्र में विशेष रुचि लेता है। वर्गाकार सिरे,
व्यावहारिक कुशलता तथा नुकीले सिरे आदर्शवादिता के सूचक कहे जाते हैं ।
४. बुध :—कनिष्ठिका उंगली के मूल में जो भाग फूला हुआ अनुभव होता
है वही बुध पर्वत कहलाता है। यह पर्वत भौतिक सम्पदा एवं भौतिक समृद्धि का
सूचक होता है इसीलिये आज के युग में इसका महत्त्व जरूरत से ज्यादा माना जाता
है। बुध प्रधान व्यक्ति अपने जीवन में जिस कार्य में भी हाथ डालते हैं उसमें पूरी-
पूरी सफलता प्राप्त कर लेते हैं। ये व्यक्ति उर्वर मस्तिष्क वाले, तीव्र बुद्धि, तथा परि-
स्थितियों को भली प्रकार से समझने वाले होते हैं। अपने जीवन में ये व्यक्ति जो
भी कार्य करते हैं उसे योजनाबद्ध तरीके से करते हैं और इनके हाथों से जो भी कार्य
प्रारंभ होता है उसे पूरा होना ही पड़ता है ।
बुध पर्वत का जरूरत से ज्यादा उभार उचित नहीं कहा जा सकता । जिन
हथेलियों में बुध पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित होता है वह चालाक और धूर्त
होता है, तथा ऐसे व्यक्ति लोगों को धोखा देने में पटु होते हैं। यदि बुध पर्वत