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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 64, कुल 350 में से

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पृष्ठ 64

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होते हैं तथा हृदय से ऐसे व्यक्ति दयालु और परोपकारी कहे जाते हैं। आर्थिक पक्ष
की अपेक्षा सम्मान तथा यश-प्राप्ति की ओर इनका झुकाव कुछ ज्यादा ही होता है।
अधिकार, स्वतंत्रता और नेतृत्व के इनमें विशेष गुण पाये जाते हैं।
विपरीत योनि के प्रति इनके मन में कोमल भावनाएं होती हैं, सुन्दर तथा
सभ्य स्त्रियों से इनका मधुर सम्बन्ध रहता है। यदि स्त्रियों के हाथों में यह पर्वत विक-
सित अवस्था में होता है तो उनमें समर्पण की भावना विशेष रूप से पाई जाती है।
यदि गुरु पर्वत का झुकाव शनि की ओर हो तो ऐसा व्यक्ति चिन्तनशील तथा
अपने ही कार्यों में लगा रहने वाला होता है परन्तु जीवन में पूर्ण सफलता न मिल पाने
के कारण धीरे-धीरे उनमें निराशा की भावना आने लग जाती है। स्वभाव से ये व्यक्ति
गम्भीर तथा अड़ियल प्रकृति के होते हैं। यदि गुरु पर्वत नीचे की तरफ खिसका हुआ
हो तो व्यक्ति को जीवन में कई बार बदनामी का सामना करना पड़ता है परन्तु साहि-
त्यिक क्षेत्र में ऐसे व्यक्ति पूर्ण सफल होते देखे गये हैं।
यदि गुरु पर्वत जरूरत से ज्यादा विकसित हो तो ऐसा व्यक्ति स्वार्थी, घमंडी
तथा स्वेच्छाचारी होता है।
जिनके हाथों में गुरु पर्वत का अभाव होता है, उनके जीवन में आत्म-सम्मान
की कमी रहती है। माता-पिता का सुख उन्हें बहुत कम मिल पाता है तथा वह निम्न
विचारों से सम्पन्न हल्के स्तर के मित्रों से सम्बन्धित रहते हैं।
यदि इस पर्वत का उभार सामान्यतः ठीक हो तो व्यक्ति में आगे बढ़ने की
भावना होती है परन्तु इनका विवाह शीघ्र हो जाता है और इनका गृहस्थ-जीवन सामा-
न्यतः सुखमय रहता है।
यदि उंगलियां नुकीली हों तथा गुरु पर्वत विकसित हो तो वह व्यक्ति अंध-
विश्वासी होता है। इसी प्रकार वर्गाकार उंगलियों के साथ विकसित गुरु पर्वत हो तो
वह एक प्रकार से जीवन में निरंकुश एवं अत्याचारी बन जाता है। यदि उंगलियां
बहुत लम्बी हों और इस पर्वत का विकास ठीक प्रकार से हुआ हो तो वह व्यक्ति
अपव्ययी तथा भोगी होता है। यदि गुरु तथा शनि पर्वत बराबर उभरे हुए हों तथा
लगभग एक-दूसरे में मिल गये हों तो वह व्यक्ति प्रबल भाग्यशाली होता है तथा
जीवन में विशेष सफलता प्राप्त करता है।
वस्तुतः गुरु पर्वत जीवन में अत्यधिक सहायक तथा उन्नति की ओर अग्रसर
करने वाला पर्वत कहा जाता है।
२. शनि : इसका आधार मध्यमा उंगली के मूल में होता है। हथेली पर इस
पर्वत का विकास असाधारण प्रवृत्तियों का सूचक कहा जाता है। यदि हाथ में इस
पर्वत का अभाव हो तो व्यक्ति जीवन में विशेष सफलता या सम्मान प्राप्त नहीं कर
पाता।