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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 350 में से

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पृष्ठ 46

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यदि शुक्र का पर्वत बहुत अधिक उठा हुआ दिखाई दे तो ऐसा व्यक्ति भोगी
और कामी होता है तथा सौन्दर्य के पीछे मटकने वाला माना जाता है। प्रेम और
सौन्दर्य के लिए यह सब कुछ करने के लिए तैयार रहता है और उस समय क्षणिक
आवेश में यह कुछ भी आगा-पीछा नहीं सोचता । यदि यह क्षेत्र दबा हुआ या कम
उन्नत होता है अथवा इस क्षेत्र पर जरूरत से ज्यादा रेखाएं एवं जाल दिखाई दें तो
ऐसा व्यक्ति निराशावादी प्रवृत्ति का होता है। इनका प्रेम भी शुद्ध प्रेम न होकर
उस प्रेम के पीछे भी वासना या स्वार्थ छिपा हुआ होता है। ये लम्बी-लम्बी योजनाएं
बनाते हैं, दिवा-स्वप्न देखते रहते हैं पर ये अपने उद्देश्यों में पूर्णतः सफलता प्राप्त
नहीं कर पाते हैं। भावना शून्य होने के कारण समाज में भी इनको पूर्ण यश नहीं
मिलता। जीवन इनका कलह पूर्ण कहा जाता है तथा वैवाहिक जीवन में जरूरत से
ज्यादा बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
उंगलियां :
मैंने पीछे के पृष्ठों में उंगलियों के बारे में कुछ संकेत दिये थे। यह ज्ञात
रहना चाहिए कि उंगलियों का सीधा सम्बन्ध मस्तिष्क से होता है और यदि उंग-
लियों पर विशेष बोझ पड़ता है तो उससे मस्तिष्क की धमनियां भी बोझिल होने
लगती हैं। साधारणतः प्रत्येक हाथ में चार उंगलियां पाई जाती हैं।
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उंगलियां