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बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 335, कुल 350 में से

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पृष्ठ 335

( ३३४ )

बात तो स्पष्ट है कि इस समय कोई बहुत बड़ी बीमारी आई होगी और लगभग मरते
मरते ही बची होगी । क्यों यह बात ठीक है ?
महिला ने स्वीकृति में गर्दन हिलाते हुए बताया कि मैं पाँचवें वर्ष में बहुत
अधिक बीमार हो गई थी घर वालों ने ऐसा समझ लिया था कि अब यह बालिक
शायद ही बचे पर म लगभग महीने भर बीमार रहकर पुनः स्वस्थ हो गई ।
पंडितजी ने जीवन रेखा का अध्ययन करते हुए आगे बताया कि यह जीवन
रेखा आगे भी दो तीन स्थानों पर कटी है । अतः यह बात भी सही है कि दसवें वर्ष
में भी कोई विशेष घटना घटित होनी चाहिए और इस बार यह घटना जलघात जैसी
दिखाई देती है ।
महिला ने उत्तर दिया—वस्तुतः दसवें वर्ष ही मैं अपनी मां के साथ तालाब
पर गई थी और वहां पर फिसल जाने के कारण मैं बहुत गहरे पानी में चली गई थी ।
यदि उस समय किनारे पर खड़े कुछ लोगों ने मुझे नहीं बचा लिया होता तो अब तक
मैं समाप्त हो गई होती ।
'बहुत खूब'—पंडितजी उत्तर दिया परन्तु अब आपको आगे के जीवन में किसी
प्रकार का कोई खतरा नहीं है । आगे जीवन रेखा पूर्णतः सीधी स्पष्ट और साफ है
और वह मणिबन्ध तक पहुंच गई है। अतः अब आगे घात या दुर्घटना जैसी कोई
बात नहीं है । और पूरी आयु लगभग ६५ और ६६ वर्ष के बीच में है ।
एक सेकण्ड ठहरिये, सूक्ष्मता से देखने पर ज्ञात होता है कि आपकी पूर्ण आयु
६५ साल ४ महीने २१ दिन स्पष्ट होती है ।
महिला ने मुस्कराकर पंडित जी की ओर कृतज्ञता से देखा ।
परन्तु इस जीवन रेखा पर शुक्र पर्वत से बहुत अधिक रेखाएं आ रही हैं और
उनमें से लगभग दो रेखाओं ने तो जीवन रेखा को ही काट दिया है । इसके साथ ही
छोटी-छोटी कई रेखाएं निकल कर आई हैं और ये सभी बाधक रेखाएं इस तथ्य की
परिचायक हैं कि आपके जीवन में जरूरत से ज्यादा बाधाएं, परेशानियां और सम-
स्याएं रही हैं । एक प्रकार से देखा जाय तो आपका बचपन अभावों में संघर्षों में तथा
कठिनाइयों में ही बीता होगा । यद्यपि आपकी मातृ रेखा और पितृ रेखा पूर्ण है इससे
वे दीर्घायु होने चाहिए परन्तु इसः कोई दो राय नहीं कि इन माता पिता से आगे के
जीवन में कोई विशेष सुख या सहयोग नहीं मिला होगा ।
यद्यपि मैं यह कहता हूं कि आपके लालन-पालन में माता पिता ने पूरा सह-
योग दिया परन्तु विवाह के बाद माता पिता की तरफ से किसी प्रकार का कोई
विशेष सहयोग मिला हो ऐसा प्रतीत नहीं होता । क्यों यह सच है न ?
महिला ने स्वीकृति में सिर हिलाया और मुंह से कुछ भी नहीं कहा ।