बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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नाक :
नाक की आकृतियां
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१. यदि चार अंगुल लम्बी नाक हो तो वे दीर्घायु होते हैं ।
२. जिसकी नाक उभरी हुई हो वे सदाचारी होते हैं ।
३. हाथी के समान नाक वाला व्यक्ति भोगी होता है ।
४. तोते के समान नाक रखने वाला व्यक्ति सुखी होता है ।
५. जिसकी नाक सीधी हो वह सौभाग्यशाली होता है ।
६. जिनके नथुने छोटे हों वह भाग्यवान पुरुष होते हैं ।
७. जिसके नाक का आगे का हिस्सा टेढ़ा हो वह आर्थिक दृष्टि से सम्पन्न होता है ।
८. नुकीली नाक वाला राजा होता है ।
६. छोटी नाक वाला धर्मात्मा होता है ।
१०. जिसकी नाक का आगे का हिस्सा दो भागों में बंटा हुआ हो वह दरिद्र होता है ।
११. चपटी नाक वाला व्यक्ति सरल स्वभाव वाला होता है ।
१२. कटी हुई नाक वाला व्यक्ति पापी होता है ।
१३. दाईं ओर झुकी हुई नाक कमजोरी का चिह्न है ।