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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 265, कुल 350 में से

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पृष्ठ 265

( २६४ )
३. यदि कनिष्ठिका का झुकाव अनामिका की तरफ हो तथा सभी पर्वत अपने
आप में विकसित हों ।
सरस्वती योग
परिभाषा : यदि कोई एक रेखा वृहस्पति पर्वत से प्रारंभ
होकर चन्द्र पर्वत तक पहुंचती हो और एक रेखा चन्द्र पर्वत से
प्रारंभ होकर गुरु पर्वत तक पहुंचती हो तथा साथ में ये दोनों
ही पूर्ण विकसित हो तो सरस्वती योग होता है ।
फल : सरस्वती योग जिसके हाथ में होता है वह
व्यक्ति अत्यन्त प्रसिद्ध होता है तथा उस पर सरस्वती की विशेष
कृपा मानी जाती है । काव्य संगीत, नृत्य आदि के क्षेत्र में वह
पारंगत होता है तथा किसी एक काल में वह विशेष निपुणता
प्राप्त करता है । अपनी कला के माध्यम से वह अपने देश में
(चित्र: सरस्वती योग) तथा विदेश में पूर्ण सम्मान तथा ख्याति अर्जित करता है । इस
प्रकार के व्यक्ति के जीवन में सरस्वती और लक्ष्मी दोनों की विशेष कृपा रहती है ।
ऐसा व्यक्ति मन से भावुक तथा सहृदय होता है और गरीबों दुखियों तथा निर्धनों की
सेवा करने के लिए तैयार रहता है ।
कैलाश योग :
परिभाषा : यदि हाथ में बुध पर्वत और सूर्य पर्वत से
रेखाएं निकल कर स्वास्थ्य रेखा से नीचे जाकर परस्पर मिलती
हों और इस प्रकार मे एक त्रिकोण का सा चिह्न बनता हो तो
कैलाश योग होता है ।
फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह व्यक्ति
राजा के समान जीवन व्यतीत करने वाला होता है तथा भौतिक
एवं आध्यात्मिक दृष्टि से जीवन मे पूर्ण आनन्द लाभ करने मे
समर्थ होता है ।
टिप्पणी : विद्वानों ने निम्नलिखित योग भी कैलाश
योग माने हैं ·
(चित्र: कैलाश योग)
१. यदि पहले मणिबन्ध के ऊपर मत्स्य का आकार हो तथा उस पर से एक
रेखा चन्द्र पर्वत की ओर जा रही हो ।
२. यदि हाथ में दो जीवन रेखाएं हों ।
३. यदि हाथ में दो भाग्य रेखाएं स्पष्ट दिखाई देती हों ।