बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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लोभ योग :
परिभाषा : यदि हृदय रेखा सीधी चलकर हथेली के
आरपार पहुंचती हो तो लोभ योग होता है ।
फल : जिसके हाथ मे यह योग होता है वह जरूरत से
ज्यादा लोभी और कंजूस होता है ।
चोरी योग :
परिभाषा : यदि बुध पर्वत विकसित हो तथा उस पर
जाल का चिह्न हो तो चोरी योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है जीवन में
उसके घर पर कई बार चोरियां होती हैं ।
टिप्पणी : इसके अलावा विद्वानों ने निम्न योग भी
चोर योग बताये हैं ।
१. बुध पर्वत अत्यन्त विकसित हो तथा स्वास्थ्य रेखा
पर द्वीप हो ।
२. यदि कनिष्ठिका के अन्तिम पर्व पर बिन्दु या क्रॉस
का चिन्ह हो ।
३. यदि अनामिका के तीसरे पर्व पर जरूरत से ज्यादा खड़ी रेखाएं हों ।
४. यदि कनिष्ठिका के अन्तिम पर्व पर क्रॉस हो ।
चाप योग :
परिभाषा : यदि सूर्य रेखा अत्यन्त छोटी-छोटी रेखाओं
में जुड़कर बनी हो तो चाप योग होता है ।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है उसका बचपन
कष्ट में बीतता है परन्तु जीवन में २८वें वर्ष के बाद से आगे
जीवन पर्यन्त वह सभी दृष्टियों से पूर्ण सुखमय जीवन व्यतीत
करता है। ऐसा व्यक्ति यात्रा का शौकीन होता है तथा यात्रा
के माध्यम से ही धन-संग्रह कर पाता है । ऐसे व्यक्ति में घमण्ड
भी जरूरत से ज्यादा होता है ।