बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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१३. यदि हृदय रेखा बढ़ कर हथेली के दूसरी तरफ पहुंच गई हो ।
१४. यदि हृदय रेखा उंगलियों के पोरों को स्पर्श कर रही हो ।
१५. यदि जीवन रेखा तथा हृदय रेखा का उद्गम स्थान अलग-अलग हो तथा
दोनों रेखाएं चौड़ी हों ।
१६. यदि स्वास्थ्य रेखा बुध रेखा के समानान्तर चलती हो ।
१७. यदि शुक्र पर्वत सामान्य रूप से विकसित हो । उंगलियां नर्म हों तथा
उनके ऊपरी सिरे नुकीले हो ।
१८. यदि हृदय रेखा पर सफेद धब्बा हों ।
१९. यदि गुरु पर्वत पर क्रास न हो परन्तु शुक्र पर्वत पर क्रास का चिन्ह
हो ।
२०. यदि मस्तिष्क रेखा नीचे की ओर झुकी हुई हो तथा आगे चलकर
जीवन रेखा से मिल जाती हो ।
२१. यदि विवाह रेखा पर द्वीप हो ।
२२. यदि अंगूठा लम्बा हो तथा हृदय रेखा दोहरी हो ।
२३. यदि हृदय रेखा संकीर्ण होकर गुरु पर्वत पर पहुंचती हो ।
२४. यदि हृदय रेखा पर भाग्य रेखा से छोटी-छोटी रेखाएं आ रही हों ।
२५. यदि वृहस्पति पर्वत के नीचे हृदय रेखा तथा भाग्य रेखा मिल रही हो ।
२६. यदि शुक्र पर्वत से कोई एक रेखा निकल कर बुध पर्वत तक जाती हो ।
२७. यदि हृदय रेखा तथा भाग्य रेखा एक जगह मिलकर जंजीरदार हो गई
हो ।
२८. यदि शुक्र पर्वत से रेखाएं निकल कर स्वास्थ्य रेखा जीवन रेखा तथा
मस्तिष्क रेखा को काटती हों ।
२९. जीवन रेखा पर शुक्र पर्वत के आसपास दो या तीन तारे के चिन्ह हों ।
३०. यदि शुक्र पर्वत से दो समानान्तर रेखाएं चन्द्र पर्वत की ओर जा रही
हों ।
३१. यदि चन्द्र पर्वत पर स्वस्तिक का चिन्ह हो अथवा अर्द्धचन्द्र का चिन्ह
हो ।
३२. यदि भाग्य रेखा मणिबन्ध के पास जाकर समाप्त हो गई हो तथा शुक्र
पर्वत पर तारे का चिन्ह हो ।
३३. यदि भाग्य रेखा चन्द्र पर्वत से प्रारम्भ होती हो ।
३४. यदि अंगूठे के दूसरे पर्व पर तारक चिन्ह हो ।