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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 220, कुल 350 में से

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पृष्ठ 220

( २१६ )
३०. बहरापन : बृहस्पति पर्वत कमजोर हो तथा इस पर्वत के नीचे मस्तिष्क
रेखा पर बिन्दु का चिह्न हो।
३१. क्षय रोग : यदि नाखून लम्बे, पतले तथा मुड़े हुए हों साथ ही मस्तिष्क
रेखा पर कई छोटे-छोटे द्वीप हों।
३२. जलोदर : चन्द्र पर्वत जरूरत से ज्यादा उभरा हुआ हो और उस पर
एक से अधिक क्रॉस के चिह्न या बिन्दु के चिह्न हों।
३३. कम्प रोग : यदि मस्तिष्क रेखा पर काला धब्बा हो और जीवन रेखा
के प्रारम्भ में तारे का चिह्न हो तो उसके शरीर के अंग थोड़े बहुत
रूप में कांपते ही रहते हैं।
३४. डिफ्थीरिया : यदि जीवन रेखा तथा मस्तिष्क रेखा कटी हुई हो एवं
शनि पर्वत के नीचे चतुर्भुज तथा क्रॉस का चिह्न हो।
३५. मोटापा : यदि हृदय रेखा टूटी हुई हो और हाथ मोटा तथा गुदगुदा
हो।
३६. हिस्टीरिया : यदि हाथ सामान्य स्तर का हो तथा चन्द्र पर्वत पर एक
से अधिक तारे के चिह्न हों।
३७. घातक रोग : यदि जीवन रेखा टूटी हुई हो तथा उसका एक खण्ड
शुक्र पर्वत से सम्बन्धित हो।
३८. पाचनशक्ति में कमी : मस्तिष्क रेखा तंग हो तथा स्वास्थ्य रेखा
लहरदार हो।
३६. स्मृति नाश : यदि मस्तिष्क रेखा कई जगह से टूटी हुई हो तो उसकी
स्मरण शक्ति बिल्कुल नहीं होती।
४०. वायु रोग : यदि जीवन रेखा के अन्त में कई शाखाएं निकल कर नीचे
की ओर बढ़ रही हों।
४१. प्लूरिसी : यदि जीवन रेखा से कोई रेखा निकल कर शनि पर्वत पर
पहुंचती हो तथा वहां त्रिकोण का चिह्न हो अथवा दो तारक चिह्न
हों, तो ऐसे व्यक्ति को प्लूरिसी अर्थात् उसके फेफड़ों में पानी का
जमाव हो जाता है।
४२. हत्या : यदि अनामिका के नीचे से पौर पर तारक चिह्न हो तो पिस्तौल
की गोली खाकर उसकी मृत्यु होती है। गांधी जी के हाथ में यह चिन्ह
स्पष्ट रूप से दिखाई देता था।
४३. आत्म हत्या : यदि दूसरी उंगली का पहला पौर बहुत ज्यादा लम्बा
हो या भाग्य रेखा के अन्त पर तारे का चिन्ह हो।