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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 209, कुल 350 में से

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पृष्ठ 209

( २०८ )
केमद्रुम योग :
परिभाषा : यदि हथेली में शुक्र पर्वत तथा सूर्य पर्वत
अविकसित हों तथा सूर्य रेखा टूटी हुई हो तो उसकी हथेली में
केमद्रुम योग बनता है।
फल : केमद्रुम योग में जन्म लेने वाला व्यक्ति हमेशा दुखी
बना रहता है। उसके हाथ में भले ही अन्य अच्छे योग हों परन्तु
केमद्रुम उन सभी अच्छे योगों का नाश कर देता है। ऐसा
व्यक्ति स्वयं गलतियां करता है, और अदूरदर्शी होने के कारण
बाद में पछताता रहता है। आर्थिक दृष्टि से यह बहुत अधिक
गरीब होता है तथा जीवन में आजीविका के साधन बार-बार
बदलता है। ऐसा व्यक्ति हमेशा दूसरों पर निर्भर रहता है।
टिप्पणी : कुछ विद्वानों का विचार है कि यदि भाग्य रेखा पुष्ट हो तो केमद्रुम
भंग हो जाता है। इसके अलावा कुछ विद्वानों ने केमद्रुम भंग के अन्य तथ्य भी स्पष्ट
किये हैं।
निम्न स्थितियां हाथ में होने पर केमद्रुम योग का प्रभाव उसके जीवन में नहीं
रहता। मेरे कहने का तात्पर्य यह है कि यदि हथेली में केमद्रुम योग हो परन्तु निम्न
स्थितियों में से कोई भी एक स्थिति हो तो केमद्रुम का असर उसके जीवन में नहीं
रहता।
१. यदि हथेली में सूर्य रेखा पूर्णतः प्रबल, स्पष्ट तथा सीधी हो।
२. यदि सूर्य रेखा से कोई एक सहायक रेखा बुध पर्वत की ओर पहुंची हो।
३. शुक्र पर्वत पुष्ट तथा विस्तृत क्षेत्र वाला हो तथा उस पर किसी प्रकार की
अन्य रेखाएं या जाल न हो।
४. चन्द्र पर्वत पूर्ण विकसित हो तथा उससे एक रेखा निकल कर बुध पर्वत
पर पहुंची हो।
५. हथेली में चार मणिबन्ध पूर्ण एवं स्पष्ट हों।
६. हथेली में आयु रेखा स्वास्थ्य रेखा तथा मस्तिष्क रेखा सीधी और स्पष्ट
हों तथा इन तीनों का परस्पर पूर्ण सम्बन्ध बना हो।
विशेष टिप्पणी : वस्तुतः हथेली में केमद्रुम योग होना अत्यन्त दुखमय होता है।
सामुद्रिक सुधा में लिखा है कि यदि किसी के हाथ में पूर्ण राज्य योग तथा प्रबल भाग्य
योग भी हो परन्तु हथेली में केमद्रुम योग होने से उनका नाश हो जाता है तथा उन
शुभ योगों का भी अशुभ फल मिलने लग जाता है।