बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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आकर्षक होता है तथा वह अपने प्रयत्नों से अपने व्यापार का विस्तार विदेशों में भी
करता है। ऐसा व्यक्ति शीघ्र निर्णय करने वाला तथा स्वस्थ मस्तिष्क का धनी होता
है। शत्रुओं का प्रबल रूप से संहार करने वाला बुद्धिमान तथा चतुर होता है।
टिप्पणी : इस योग में यह बात ध्यान रखने की है कि उसके हाथ में बुध पर्वत
विकसित हो, लालिमा लिए हुए तथा अपने स्थान पर स्थित हो। वह न तो हथेली
के बाहर निकला हुआ हो और न सूर्य की ओर झुका हुआ हो ।
इन्द्र योग :
परिभाषा : जिसके हाथ में मंगल पर्वत अपने स्वाभाविक
रूप से विकसित हो तथा मस्तिष्क रेखा तथा भाग्य रेखा पूर्ण
लम्बाई लिए हुए सीधी और स्पष्ट हो तो उस व्यक्ति की हथेली
इन्द्र में योग होता है।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में इन्द्र योग होता है वह व्यक्ति
बलिष्ठ, चतुर तथा सफल रणनीतिज्ञ होता है। ऐसा व्यक्ति
मिलिट्री में या पुलिस में उच्च पद प्राप्त करता है एवं राजा के
समान अपना जीवन व्यतीत करता है। ऐसा व्यक्ति बातचीत
करने में चतुर एवं सरल स्वभाव का होता है तथा उसका भाग्यो-
दय २८वें साल के बाद ही विशेष रूप से होता देखा गया है।
टिप्पणी : यह योग राज योग के समान है ऐसा अनुभव हुआ है कि जिसके हाथ में
यह योग होता है, उसकी आयु बहुत अधिक बड़ी नहीं होती परन्तु फिर भी ऐसा
व्यक्ति छोटी आयु में ही पूर्ण प्रसिद्धि प्राप्त करके अपना नाम चारों ओर फैला देता
है। भौतिकता की दृष्टि से देखा जाय तो इनके जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी
नहीं रहती। ऐसे व्यक्ति जीवन में पूर्ण यश, सम्मान, तथा प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं।
मरुत योग :
यदि हाथ में शुक्र पर्वत पूर्ण विकसित हो और उस पर
किसी प्रकार की बाधक रेखाएं न हों साथ ही गुरु पर्वत स्पष्ट
हो और उस पर क्रास का चिह्न हो एवं चन्द्र रेखा बलवान एवं
सीधी व स्पष्ट हो तो ऐसे व्यक्ति के हाथ में मरुत् योग होता है।
फल : जिस व्यक्ति के हाथ में मरुत् योग्य होता है वह व्यक्ति
बातचीत की कला में अत्यधिक निपुण तथा योग्य होता है।
उसका हृदय विशाल और दूसरों की सहायता करने में आनन्द