सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 196, कुल 350 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 196

( १२५ )
५. शिल्पकार :
यदि हाथ की उंगलियां लम्बी हों तथा ऊपर के सिरे
चौकोर हों साथ ही सूर्य रेखा पूर्णतः विकसित स्पष्ट तथा
गहरी हो एवं शनि क्षेत्र पर किसी प्रकार की बाधक रेखाएं
न हों और उसका अंगूठा पतला तथा कुछ लम्बाई लिये हुए
हो तो निश्चय ही ऐसा व्यक्ति एक सफल मूर्तिकार अथवा
शिल्पकार होता है ।
शिल्पकार
६. सैनिक :
जिस व्यक्ति का शरीर अपने आप में स्वस्थ, पुष्ट,
प्रबल तथा पूरी लम्बाई लिये हुए हो और उसके हाथ सामा-
न्यतः लम्बे हों तो ऐसे व्यक्ति में सैनिक के चिह्न देखने को
मिलते हैं ।
इसके साथ ही साथ उसकी हथेली में यदि मंगल क्षेत्र
विस्तार लिये हुए हो तथा मंगल पर किसी उज्ज्वल तारे का
चिह्न हो साथ ही उसकी भाग्य रेखा विकसित तथा स्पष्ट हो
तो वह व्यक्ति निश्चय ही एक सफल स्थल सैनिक बनता है ।
यदि ऊपर लिखे हुए गुणों के साथ-साथ दोनों मंगल
हथेली मे बहुत अधिक विकसित हों एवं सूर्य पर्वत पर सूर्य
सैनिक रेखा स्पष्ट और निर्दोष रूप से अंकित हो तथा अंगूठा मजबूत
लम्बाई लिये हुए तथा सामान्यतः पीछे की तरफ झुका हुआ हो तो वह व्यक्ति
निश्चय ही जनरल या ब्रिगेडियर होता है ।
ऊपर लिखे गुणों के अलावा यदि सूर्य रेखा पर सुन्दर त्रिकोण का चिह्न हो
तथा सभी उंगलियां अपने आप में पूर्ण लम्बाई लिये हुए हों तो ऐसा व्यक्ति निश्चय
ही स्थल सेनाध्यक्ष होता है ।