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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 156, कुल 350 में से

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पृष्ठ 156

( १५५ )

ऐसा व्यक्ति समझदार तथा सच्चरित्र होने पर भी उसको अपयश का सामना
करना पड़ता है, और सामाजिक जीवन में उसे कलंकित होना पड़ता है। ऐसे व्यक्ति
अपने जीवन से निराश ही रहते हैं।
५. शुक्रवलय :
यदि कोई रेखा तर्जनी और मध्यमा से निकलकर शनि
और सूर्य के पर्वतों को घेरती हुई अनामिका और कनिष्ठिका
अंगुली के बीच में समाप्त होती हो तो ऐसी मुद्रा शुक्र मुद्रा
या शुक्र वलय कहलाती है। जिनके हाथों में यह वलय होता
है उन्हें जीवन में कमजोर और परेशान ही देखा है। जिनके
हाथों में ऐसी मुद्रा होती है, वे स्नायु संबंधी रोगों से पीड़ित
तथा अधिक से अधिक भौतिकवादी होते हैं। इनको जीवन
में बराबर मानसिक चिन्ताएं बनी रहती हैं, और इनको जीवन
में सुख या शान्ति नहीं मिल पाती।
यदि यह मुद्रा जरूरत से ज्यादा चौड़ी हो तो ऐसा
व्यक्ति अपने पूर्वजों का संचित धन समाप्त कर डालता है।
ऐसा व्यक्ति प्रेम में उतावली करने वाला तथा पर-स्त्री-गामी
होता है। जीवन में इसको कई बार बदनामियों का सामना करना पड़ता है।
यदि शुक्र वलय की रेखा पतली और स्पष्ट हो तो ऐसा व्यक्ति समझदार एवं
परिस्थितियों के अनुसार अपने आपको ढालने वाला होता है। ये व्यक्ति बातचीत में
माहिर होते हैं और बातचीत के माध्यम से सामने वाले व्यक्ति को प्रभावित कर
लेते हैं।
यदि किसी के हाथ में एक से अधिक शुक्र वलय हों तो वह कई स्त्रियों से
शारीरिक संबंध रखने वाला होता है। इसी प्रकार यदि किसी स्त्री के हाथ में ऐसा
वलय हो तो वह कई पुरुषों से सम्पर्क रखती है।
यदि शुक्र मुद्रा मार्ग में टूटी हुई हो तो वह अपने जीवन में निम्न जाति की
स्त्रियों से यौवन संबंध रखता है। परन्तु साथ ही साथ ऐसा व्यक्ति जीवन में अपने
दुष्कर्मों के कारण पछताता भी है।
यदि शुक्र मुद्रा से कोई रेखा निकलकर विवाह रेखा को काटती हो तो उसे
जीवन में वैवाहिक सुख नहीं के बराबर मिलता है। कई बार ऐसे व्यक्तियों का
विवाह होता ही नहीं।
यदि शुक्र मुद्रा की रेखा आगे बढ़कर भाग्य रेखा को काटती हो तो वह
व्यक्ति दुर्भाग्यशाली होता है, तथा उसे जीवन में किसी प्रकार का कोई सुख प्राप्त
नहीं होता।