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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 151, कुल 350 में से

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पृष्ठ 151

( १५० )
११. यदि विवाह रेखा आगे जाकर कई भागों में बंट जाय तो उसका वैवाहिक
जीवन अत्यन्त दुखमय होता है ।
१२. यदि विवाह रेखा मस्तिष्क रेखा को छू ले तो वह व्यक्ति अपनी पत्नी
की हत्या करता है । यदि बुध पर्वत पर विवाह रेखा कई भागों में बंट जाय तो बार
बार सगाई टूटने का योग बनता है ।
१३. यदि विवाह रेखा सूर्य रेखा को स्पर्श कर नीचे की ओर बढ़ती हो तो
ऐसा विवाह अनमेल विवाह कहलाता है ।
१४. यदि विवाह रेखा की एक शाखा नीचे झुककर शुक्र पर्वत तक पहुंच
जाय तो उसकी पत्नी व्यभिचारिणी होती है ।
१५. यदि विवाह रेखा पर काला धब्बा हो तो उसे अपनी पत्नी का सुख नहीं
मिलता ।
१६. यदि विवाह रेखा आगे चलकर आयु रेखा को काटती हो तो उसका
वैवाहिक जीवन कला पूर्ण रहता है ।
१७. यदि विवाह रेखा, भाग्य रेखा तथा मस्तिष्क रेखा परस्पर मिलती हो तो
उसका वैवाहिक जीवन अत्यन्त दुखदायी समझना चाहिए ।
१८. यदि विवाह रेखा को कोई आड़ी रेखा काटती हो तो व्यक्ति का वैवाहिक
जीवन बाधाकारक होता है ।
१६. यदि कोई अन्य रेखा विवाह रेखा में आकर या विवाह रेखा स्थल पर
आकर मिल रही हो तो प्रेमिका के कारण उसका गृहस्थ जीवन नष्ट हो जाता है ।
२०. यदि विवाह रेखा के प्रारंभ में द्वीप का चिह्न हो तो काफी बाधाओं के
बाद उसका विवाह होता है ।
२१. यदि विवाह रेखा जहां से झुक रही हो उस जगह क्रॉस का चिह्न हो तो
उसकी पत्नी की मृत्यु अकस्मात होती है ।
२२. यदि विवाह रेखा को सन्तान रेखा काटती हो तो उसका विवाह अत्यन्त
कठिनाई के बाद होता है ।
२३. यदि विवाह रेखा पर एक से अधिक द्वीप हों तो व्यक्ति जीवन भर
कुआंरा रहता है ।
२४. यदि बुध क्षेत्र के आस-पास विवाह रेखा के साथ-साथ दो तीन रेखाएं
चल रही हों तो जीवन में पत्नी के अलावा उसके संबंध दो-तीन स्त्रियों से रहते हैं ।
२५. यदि विवाह रेखा बढ़कर कनिष्ठिका की ओर झुक जाय तो उसके जीवन
साथी की मृत्यु उसके पूर्व होती है ।
२६. विवाह रेखा का अचानक टूट जाना गृहस्थ जीवन में बाधा स्वरूप
समझना चाहिए ।