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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 129, कुल 350 में से

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पृष्ठ 129

( १२८ )
४. छोटी सूर्य रेखा व्यक्ति के जीवन में परिश्रम एवं संघर्ष के बाद ही
सफलता देने में सहायक होती है ।
५. सूर्य रेखा जिस जगह कट जाती है आयु के उस भाग में वह व्यक्ति अपना
व्यापार अथवा कार्य बदल लेता है ।
६. यदि हथेली गहरी हो और सूर्य रेखा स्पष्ट हो तो उस व्यक्ति की प्रतिभा
का सही रूप में उपयोग नहीं हो पाता ।
७. यदि यह रेखा पतली या फीकी हो तो वह व्यक्ति अपनी कला का पूरा-
पूरा उपयोग नहीं कर पाता ।
८. यदि सूर्य रेखा के मार्ग में द्वीप के चिह्न हों तो वह जीवन में दिवालिया
होता है तथा उसको समाज से अपयश मिलता है ।
६. यदि हथेली में वृहस्पति पर्वत उभरा हुआ हो और सूर्य रेखा गहरी हो तो
उस व्यक्ति के संबंध अत्यन्त ऊंचे स्तर के व्यक्तियों से होते हैं ।
१०. यदि सूर्य रेखा पर तारे का चिह्न हो तो वह व्यक्ति अपनी कला के
माध्यम से विश्वव्यापी सफलता प्राप्त करता है ।
११. हथेली में जिस स्थान पर सूर्य रेखा सबसे अधिक गहरी हो आयु के उस
भाग में वह व्यक्ति विशेष धन लाभ प्राप्त करता है ।
१२. यदि सूर्य रेखा की समाप्ति पर बिन्दु का चिह्न हो तो उसे जीवन में
बहुत अधिक कष्ट उठाना पड़ता है और अन्त में सफलता मिलती है ।
१३. यदि हथेली में सूर्य रेखा पतली हो परन्तु सीधी और स्पष्ट हो तो वह
व्यक्ति समृद्धिवान होता है ।
१४. यदि सूर्य रेखा के अन्त में नक्षत्र का चिह्न हो तो उसे राष्ट्रव्यापी
सम्मान मिलता है ।
१५. यदि सूर्य रेखा के प्रारम्भ में और अन्त में नक्षत्र का चिह्न हो तो उसे
जीवन में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं रहती ।
१६. यदि सूर्य रेखा की समाप्ति कई छोटी-छोटी रेखाओं से हो तो उसे
जीवन में असफलता ही मिलती है ।
१७. यदि सूर्य रेखा की समाप्ति किसी तिरछी रेखा से हो तो वह जीवन में
भली प्रकार से प्रगति नहीं कर पाता ।
१८. यदि सूर्य रेखा की समाप्ति पर क्रॉस का चिह्न हो तो व्यक्ति का अन्त
अत्यन्त दुखमय होता है ।
१६. यदि सूर्य रेखा कई जगह से टूटी हुई हो तो उसमें प्रतिभा तो होती है
परन्तु उसके माध्यम से न तो वह श्रेष्ठ धन लाभ कर सकता है और न उसे उच्च
कोटि का सम्मान ही मिलता है ।