बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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४०. यदि हृदय रेखा पर सफेद बिन्दु हों तो उसका वैवाहिक जीवन आदर्श
कहा जाता है ।
४१. यदि हृदय रेखा पर त्रिकोण का चिह्न हो तो उसे विश्व व्यापी कीर्ति
मिलती है ।
४२. यदि हृदय रेखा गुरु पर्वत पर जाकर मंगल पर्वत की ओर मुड़ जाती
है तो वह व्यक्ति मूर्ख होता है ।
४३. यदि यह रेखा चतुर्भुज के साथ कहीं पर भी समाप्त होती है तो वह
अस्थिर स्वभाव वाला माना जाता है ।
४४. यदि यह रेखा शनि पर्वत के नीचे मस्तिष्क रेखा से मिलती हो तो
उसके जीवन में कई दुर्घटनाएं होती हैं ।
४५. यदि हृदय रेखा बुध पर्वत के नीचे मस्तिष्क रेखा से मिलती हो तो उस
व्यक्ति की यौवन काल में ही मृत्यु हो जाती है ।
४६. यदि यह रेखा नीचे झुक कर चन्द्र पर्वत की ओर जा रही हो, या चन्द्र
पर्वत से कोई रेखा निकलकर इससे मिलती हो तो उसे जीवन में अप्रत्याशित
सफलता प्राप्त होती है ।
४७. यदि कुछ तिरछी रेखाएं हृदय रेखा को कई जगह से काटती हों तो
उसे जीवन में कई प्रकार के रोग होते हैं ।
४८. यदि हृदय रेखा से निकल कर कोई सहायक रेखा मस्तिष्क रेखा से
जुड़ जाती है तो उसमें प्रेम करने की क्षमता जरूरत से ज्यादा होती है ।
४६. यदि हृदय रेखा से कोई सहायक रेखा निकल कर शनि पर्वत की ओर
जाती है तो उसे प्रेम के क्षेत्र में निराशा मिलती है ।
५०. यदि भाग्य रेखा से कोई सहायक रेखा निकल कर हृदय रेखा को स्पर्श
करती हो तो उसका गृहस्थ-जीवन परेशानी पूर्ण होता है ।
५१. यदि शुक्र पर्वत से कोई सहायक रेखा निकल कर हृदय रेखा से
मिलती हो तो वह व्यक्ति जरूरत से ज्यादा भोगी होता है ।
५२. यदि इस रेखा पर बुध पर्वत के नीचे क्रॉस हो तो उसे व्यापार में बार-
बार असफलता का मुंह देखना पड़ता है ।
५३. यदि इस रेखा से कई चतुर्भुज बनते हों तो उसकी प्रतिभा अत्यधिक
होती है, परन्तु अपने मामले में वह असफल रहता है ।
५४. यदि हृदय रेखा गुरु पर्वत के नीचे कई शाखाओं में बंट जाती है, तो
वह व्यक्ति भाग्यशाली होता है ।
५५. यदि इस रेखा के प्रारम्भ में ही शाखा पुंज हो तो वह व्यक्ति जरूरत
से ज्यादा बोलने वाला होता है ।