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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 117, कुल 350 में से

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पृष्ठ 117

हृदय रेखा
हथेली में जीवन रेखा, और मस्तिष्क रेखा का जितना महत्त्व है लगभग उतना
ही महत्त्व हृदय रेखा का भी है । इसलिये विद्वानों को चाहिए कि वह हृदय रेखा के
बारे में सावधानी के साथ अध्ययन करें ।
जिस व्यक्ति के हाथ में हृदय रेखा शुद्ध, स्पष्ट, निर्दोष और ललायी लिये हुए
होती है, वह व्यक्ति वास्तव में ही अपने जीवन में सफल होता है, और उसे समाज से
पूरा यश तथा सम्मान मिलता है। ऐसे व्यक्ति सामाजिक उत्तरदायित्व को अनुभव
करते हैं और अपने जीवन में मानवोचित गुण सामने रखकर आगे बढ़ते हैं ।
यदि यह रेखा अस्पष्ट कमजोर टूटी हुई या कटी-छटी होती है तो वह व्यक्ति
कितना ही दृढ़ एवं धनवान क्यों न हो उसे सही रूप में मानव नहीं कहा जा सकता
क्योंकि ऐसा व्यक्ति हृदय से स्वार्थी, पापी तथा कलुषित होगा। ऐसे व्यक्ति का सहज
ही विश्वास नहीं करना चाहिए ।
हृदय रेखा मनुष्य की हथेली में कनिष्ठिका उंगली के नीचे बुध पर्वत के नीचे
से निकलकर सूर्य तथा शनि क्षेत्र को पार करती हुई गुरु पर्वत तक जाती है, परन्तु
सभी हाथों में ऐसा नहीं होता । सामान्यतः इस रेखा की पांच स्थितियां पायी जाती
हैं जो कि निम्नलिखित हैं :
१. पहले प्रकार की हृदय रेखा वह होती है जो बुध पर्वत के नीचे से प्रारम्भ
होकर सूर्य और शनि पर्वत के नीचे चलती हुई गुरु पर्वत पर जाकर समाप्त होती है।
२. कुछ लोगों के हाथों में यह रेखा बुध पर्वत के नीचे से प्रारम्भ होकर सूर्य
शनि तथा गुरु पर्वत के नीचे-नीचे चलती हुई हथेली के उस पार तक जा पहुंचती है।
३. कुछ लोगों के हाथों में यह रेखा बुध पर्वत के नीचे से निकलकर सूर्य
पर्वत के नीचे ही समाप्त हो जाती है ।
४. कुछ हाथों में यह रेखा बुध पर्वत के नीचे से निकल कर शनि पर्वत के
नीचे समाप्त हो जाती है।
५. कुछ व्यक्तियों की हथेलियों में यह रेखा बुध पर्वत के नीचे से निकल कर
तर्जनी और मध्यमा के बीच में जाकर समाप्त होती है ।
उपर्युक्त पांचों ही प्रकार की स्थितियों का अध्ययन करने से उनका फलादेश में
अन्तर आता है । इस रेखा से मानव का हृदय उसकी इच्छाएं, उसका व्यवहार,