बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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७८. यदि कोई रेखा शुक्र पर्वत से निकलकर मस्तिष्क रेखा को काटती हो
तो उसका गृहस्थ-जीवन बरबाद हो जाता है ।
७६. यदि मस्तिष्क रेखा से कोई शाखा निकलकर शुक्र पर्वत की ओर जाती
हो तो उसका प्रेम जीवन-भर गुप्त बना रहता है ।
८०. यदि इस रेखा से कोई सहायक रेखा निकल कर गुरु पर्वत की ओर
जाती हो तो वह व्यक्ति किराने का व्यापारी होता है ।
८१. यदि इस रेखा से कोई सहायक रेखा निकल कर शनि पर्वत की ओर
जाती हो तो वह जीवन में उच्चकोटि का धार्मिक व्यक्ति होता है ।
८२. यदि इस रेखा से निकल कर कोई सहायक रेखा सूर्य पर्वत की ओर
जाती हो तो उसे आकस्मिक धन-लाभ होता है ।
८३. यदि इस रेखा से कोई सहायक रेखा बुध पर्वत की ओर जाती हो तो
निश्चय ही वह लाखों का स्वामी होता है ।
८४. यदि इस रेखा के अन्त में रेखाओं का गुच्छा-सा हो तो वह व्यक्ति
कुटिल झूठा एवं चालाक होता है ।
८५. यदि शनि पर्वत के नीचे इस रेखा पर सफेद धब्बे हों तो उसे जीवन में
आर्थिक सफलता मिलती है ।
८६. यदि सूर्य पर्वत के नीचे इस रेखा पर सफेद धब्बे हों तो उसे राष्ट्र-
व्यापी सम्मान मिलता है ।
८७. यदि बुध पर्वत के नीचे इस रेखा पर सफेद धब्बे हों तो वह व्यक्ति
करोड़पति होता है ।
८८. यदि मंगल पर्वत बलवान हो और इस रेखा के अन्त में त्रिकोण बना
हुआ हो तो वह अपने जीवन में किसी न किसी की हत्या अवश्य करता है ।
८६. यदि इस रेखा पर कहीं पर भी लाल धब्बा हो तो सिर पर चोट लगने
से उस व्यक्ति की मृत्यु होती है ।
६०. यदि इस रेखा पर कहीं पर भी नीला धब्बा होता है तो वह जीवन में
अपराधी मनोवृत्ति का होता है ।
यदि यह रेखा तर्जनी के मूल तक पहुंच जाए तो वह जीवन में असफल व्यक्ति
होता है ।
६१. 'यदि यह रेखा मध्यमा उंगली पर चढ़ जाय तो उस व्यक्ति की डूबने
से मृत्यु होती है ।