सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

पृष्ठ 113, कुल 350 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 113

( ११२ )
४५. यदि हृदय रेखा तथा जीवन रेखा के अन्तिम छोर पर त्रिकोण का
चिह्न हो तो यह शुभ माना गया है ।
४६. यदि मस्तिष्क रेखा हथेली के आरपार जाती हुई दिखाई दे तो उस
व्यक्ति की स्मरणशक्ति अत्यन्त तीव्र होती है और वह जीवन में मेधावी कहा
जाता है ।
४७. यदि हृदय रेखा छल्लेदार हो तो उसे सिर के रोग बराबर बने रहते हैं ।
४८. यदि छोटा अंगूठा हो पर साथ में मस्तिष्क रेखा हल्की हो तो वह
व्यक्ति अपनी ही मूर्खता से दिवालिया हो जाता है ।
४९. यदि बुध पर्वत विकसित हो परन्तु मस्तिष्क रेखा कमजोर हो तो उसे
जीवन में बहुत बड़ा विश्वासघात सहन करना पड़ता है ।
५०. यदि चौड़ी हथेली हो तथा सूर्य पर्वत कमजोर हो, परन्तु मस्तिष्क रेखा
स्पष्ट हो तो भी वह व्यक्ति जीवन में सफल नहीं हो पाता ।
५१. पतली हृदय रेखा मानसिक दुर्बलता को स्पष्ट करती है ।
५२. यदि मस्तिष्क रेखा पर छोटे-छोटे कई द्वीप हों तो उस व्यक्ति को
सन्निपात की अवस्था में मरना पड़ता है ।
५३. यदि मस्तिष्क रेखा टेढ़ी-मेढ़ी हो तो, वह व्यक्ति संकुचित विचार-धारा
का होता है ।
५४. यदि हृदय रेखा कमजोर हो और मस्तिष्क रेखा स्पष्ट हो तो उसे जीवन
में क्षयरोग का सामना करना पड़ता है ।
५५. यदि जीवन रेखा ऊपर से उद्गम करती हुई आगे बढ़ती हो, और
साथ में कई छोटी-मोटी रेखाएं हों तो ऐसा व्यक्ति अत्यधिक शक्तिशाली होता है।
५६. यदि इस रेखा के अन्त में चतुर्भुज हो तो वह व्यक्ति विदेश में सफलता
प्राप्त करता है ।
५७. यदि गुरु एवं मंगल पर्वत विकसित हो तथा मस्तिष्क रेखा स्पष्ट हो
तो ऐसे व्यक्ति में असाधारण आत्मविश्वास एवं प्रबल इच्छाशक्ति होती है ।
५८. यदि मस्तिष्क रेखा अंगूठे के पास में से होकर चल रही हो तो उसकी
आयु बहुत कम होती है ।
५९. यदि हृदय रेखा की ओर बढ़ती हुई यह रेखा बीच में कई जगह टूटी
हुई हो तो उसे जीवन में मिर्गी का रोग होता है ।
६०. यदि यह रेखा जीवन रेखा के साथ-साथ आगे बढ़ रही हो तो प्रेम में
विश्वासघात होने के कारण इसकी मृत्यु होती है ।
६१. यदि यह रेखा चन्द्र पर्वत पर जाकर समाप्त होती है तो वह व्यक्ति
प्रसिद्ध तांत्रिक होता है ।