बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
पृष्ठ 110, कुल 350 में से
संदर्भ में पढ़ें( १०६ )
व्यक्ति स्वच्छन्द प्रकृति का होता है । वह अपने तरीके से काम करता है और किसी
के दबाव में कार्य नहीं करता ।
४. यदि किसी स्त्री के हाथ में मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा का उद्गम
अलग-अलग हो तो वह स्त्री कुलटा होती है ।
५. यदि मस्तिष्क रेखा से कोई शाखा निकल कर गुरु पर्वत के अन्त तक पहुंच
जाती है तो वह व्यक्ति देश का श्रेष्ठ साहित्यकार अथवा कलाकार होता है । वह
अपना जीवन शालीनता से व्यतीत करने में समर्थ होता है ।
६. यदि मस्तिष्क रेखा हथेली के बीच में जाकर नीचे की ओर झुक जाती
है तो ऐसा व्यक्ति धन के प्रति बहुत अधिक मोह रखने वाला होता है । उसकी
इच्छाएं ऐश्वर्य में जीवन व्यतीत करने की होती हैं । परन्तु परिस्थितियों के कारण वह
अपनी इच्छाओं की पूर्ति नहीं कर पाता ।
७. यदि मस्तिष्क रेखा बढ़कर हृदय रेखा को छू ले तो वह व्यक्ति अपनी पत्नी
के अलावा अन्य कई स्त्रियों से सम्बन्ध रखने वाला होता है । परन्तु जीवन में इस क्षेत्र
में उसे बदनामी भी मिलती है ।
८. यदि मस्तिष्क रेखा हृदय रेखा से लिपटती हुई-सी आगे बढ़ती है तो ऐसा
व्यक्ति क्रोध में अपनी पत्नी या प्रेमिका की हत्या कर देता है ।
९. मस्तिष्क रेखा का झुकाव जिस पर्वत की ओर विशेष होता है उस पर्वत
के गुणों में वृद्धि हो जाती है उदाहरणार्थ यदि इसका झुकाव गुरु पर्वत की ओर
होता है तो वह व्यक्ति श्रेष्ठ साहित्यकार या तत्त्वज्ञानी होता है ।
१०. यदि मस्तिष्क रेखा शनि पर्वत की ओर जा रही हो तो ऐसा व्यक्ति
दार्शनिक अथवा चिन्तक होता है ।
११. यदि यह रेखा सूर्य पर्वत की ओर झुकती हुई दिखाई दे तो वह व्यक्ति
अत्यन्त उच्च पद प्राप्त करता है ।
१२. यदि मस्तिष्क रेखा का झुकाव बुद्ध पर्वत की ओर प्रतीत हो तो ऐसा
व्यक्ति एक सफल व्यापारी होता है, तथा व्यापार के माध्यम से वह अतुलनीय धन
प्राप्त करता है ।
१३. यदि मस्तिष्क रेखा लहराती हुई आगे बढ़ती हो तो ऐसे व्यक्ति का
चित्त अस्थिर होता है, तथा उसकी कथनी और करनी में समानता एवं एकरूपता नहीं
रह पाती ।
१४. यदि मस्तिष्क रेखा आगे चलकर चन्द्र पर्वत की ओर जाती हुई दिखाई
दे तो निश्चय ही वह व्यक्ति कवि होता है और जीवन में कई बार जलयात्रा
करता है ।