बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)
Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana
महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंजीवन रेखा
जीवन रेखा ही हथेली में एक ऐसी रेखा है जो प्रत्येक व्यक्ति के हाथ में
पाई जाती है। यदि किसी के हाथ में यह रेखा न देखने को मिले तो यह समझना
चाहिए कि ऐसे व्यक्ति का व्यक्तित्व शून्यवत् है और उस व्यक्ति का जीवन शक्ति
का सर्वथा लोप हो गया है। ऐसे व्यक्ति का जीवन किसी भी समय समाप्त हो सकता
है, कई बार मंगल रेखा चल कर इस रेखा को बल देती है, कभी-कभी शनि रेखा भी
इस रेखा को बल देती हुई दिखाई दी है परन्तु फिर भी जो जीवन रेखा अपने आप
में निर्दोष और स्पष्ट होती है वास्तव में वही रेखा मानव के लिये कल्याणकारी मानी
जाती है।
इसी रेखा से व्यक्ति की आयु का पता चलता है तथा इस रेखा के माध्यम से
यह ज्ञात किया जा सकता है कि जीवन में कौन-कौन सी दुर्घटनाएं किस-किस समय
घटिया होंगी तथा मृत्यु का कारण और मृत्यु का समय भी इसी रेखा से ज्ञात होता
है।
यह रेखा बृहस्पति पर्वत के नीचे से निकलती है पर कई बार यह रेखा
बृहस्पति पर्वत के ऊपर से भी निकलती हुई दिखाई दी है। इस रेखा के बारे में यह
ध्यान रखना अत्यन्त जरूरी है कि यह रेखा शुक्र पर्वत को जितने ही बड़े रूप में
घेरती है उतनी ही यह रेखा ज्यादा श्रेष्ठ मानी जाती है। यद्यपि कई बार यह रेखा
शुक्र पर्वत को अत्यन्त संकीर्ण बना देती है जब ऐसा तथ्य हथेली में दिखाई दे तब यह
समझ लेना चाहिए कि इस व्यक्ति की प्रगति जीवन में कठिन ही होगी, साथ ही साथ
इस व्यक्ति को जीवन में प्रेम भोग सुख आदि सांसारिक गुणों की न्यूनता ही रहेगी ।
अंगूठे के पास में से होकर यदि यह रेखा निकले तो उस व्यक्ति की आयु बहुत कम
होती है।
जीवन रेखा जितनी ही ज्यादा गहरी स्पष्ट और बिना टूटी हुई होती है
उतनी ही वह ज्यादा अच्छी कहलाती है। ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य उन्नत होगा,
उसके हृदय में प्रेम और सौन्दर्य की भावना विकसित रहेगी परन्तु जिसके हाथ में यह
रेखा कटी-फटी या टूटी हुई अथवा अस्पष्ट दिखाई दे तो उसका जीवन दुखमय
भावनाशून्य एवं दुर्घटनाओं से युक्त रहता है। ऐसे व्यक्ति तुनक मिजाज चिड़चिड़े
तथा बात-बात पर क्रोधित होने वाले होते हैं।