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सर्वकोश
बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

बृहत् सामुद्रिक शास्त्र एवं हस्तरेखा विज्ञान (प्राचीन ऋषि प्रणीत सानुवाद सटीक)

Vrihat Samudrika Shastra and Hastarekha Vijnana

महर्षि गर्ग एवं नारद परम्परा द्वारा

DevanagariHindipublished350 पृष्ठ

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( ९६ )
रविवलय
४. रविवलय : इसे “रिंग आफ सन” कहते हैं तथा
हिन्दी में इसको सूर्य मुद्रा या सूर्य वलय भी कहा जाता है।
यह अनामिका उंगली के मूल में अंगूठी की तरह सूर्य पर्वत को
घेर लेती है। इस रेखा का एक छोर मध्यमा अनामिका के
बीच में होता है तथा दूसरा छोर अनामिका कनिष्ठिका के
बीच में पाया जाता है जिस किसी हाथ में यह वलय देखा
जाता है वह इसी रूप में होता है।

वाचालता, विज्ञान
चतुराई, चोरी
मानसिक विश्व
दया, अहिंसा, त्याग
उच्चादर्श, आत्मज्ञान
तेज, सम्मान
अध्ययन, विचार, पूजा
अन्धविश्वास, गंभीरता
निराशा, घुटन
धर्म, यश, मान,
नेतृत्व, महत्त्वाकांक्षा
व्यावहारिक विश्व | बुध | सूर्य | शनि | गुरु
साहस, संतुलन
नियमबद्धता, शान्ति | ऊर्ध्व मंगल | मंगल का मैदान | जीवन रेखा
हिंसा, क्रोध
इच्छाशक्ति
तर्क शक्ति
निम्न विश्व | कल्पना | ऊर्ध्व चन्द्र | शुक्र
रहस्य
स्वार्थ | मध्य चन्द्र
वासना
असाधारण प्रकृति | निम्न चन्द्र | सुन्दर, वासना, कला, सहानुभूति
अस्थिरता | १००%