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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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३४८ विविध तीर्थ-कल्प
सिद्ध विनायक ११, १२ सुप्रतिष्ठ सेठ ५८
सिद्धसेन दिवाकर २००, २०१ सुपार्श्व (जिन) १६१, १६७, ३६,
२०२, २१८ ३८, ४१
सिद्धार्था (रानी) १२७ सुपार्श्व ९३
सिद्धक्षेत्र १, १० सुपार्श्वपट ३८
सिद्धि पर्वत १ सुपार्श्वस्तूप १९३
सिद्धि शेखर १ सुप्रभ ९४
सिरोह (नगर) २१५ सुबुद्धि ७०, ८२, २०९
सीता देवी १४२, ५४, ७३, ११८, सुभद्रा १४६
२३२ सुभूम ६१, २१२
सीता देवी देहरासर १९३ सुमतिजिन ५३, २०६, २२५
सीता कुण्ड ५४ सुमतिजिन पादुका १९३
सिंहनिषद्यायतन ५४ सुमालि २३४
सिंहरथ ९८ सुमित्र ५१
सुग्रीव ९४ सुमुख ९३
सुजात १४९ सुमुख मन्त्री ९१
सुतारा १५५, १५६, १५७ सुमंगल ९
सुदर्शन (सेठ) १४८, १५६ सुमंगला १८३
सुदर्शना ४६, ४७ सुलतान सराय १०५, २१६
सुदर्शना (भ०महावीर की बहिन) सुरदेव ९३
९६ सुरम्या नगरी ४८
सुदामा १३ सुरसिद्ध ४४
सुधर्म गणधर १७०, १७१, १७४ सुरेन्द्रदत्त - ४२
सुनंद (१) ९३ सुलसा ९३
सुनंद (२) १४९ सुविधि १९३
सुनंदा २०१ सुव्रता देवी - ७४
सुस्थिताचार्य १५७, १८३