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विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)

Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri

आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा

DevanagariSanskritpublished442 पृष्ठ

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३४६ विविध तीर्थ-कल्प
शातवृद्ध ९४ शाव ११, २२, २, १५
शातवाहन १०६ शासनदेवी ४३, २६
शातिसूरि १२० श्रावस्ती नगरी ७७, १९३, १७८,
शालिभद्र ५०, १६० १६१
शिवादेवी ८१ श्रीपाल राजा २३४
शीतलनाथ १९३ श्रीयक १५५
शीलादित्य ६५ श्रीदेवी १४०, १४१, १६५, २४३
शुक्र ३ श्रीपर्वत १८१, १९४, १९५
शिवंकर २४० श्रीपुर ४६, १९५, २३४, २३५,
शूद्रक १३५, १३६, १३७, १३८, २४३
१३९, १४०, १४१, १४२, १४३, श्रीपुंज (राजा) ३३
१४५ श्रीप्रभ ९
शुद्धदन्त ९४ श्रीमाता (देवी) ३३
शेष (नागराज) १३१ श्रीमल्पत्तन (पुर) १९५, ६६
शैलक ३ श्रेणिक राजा ५१, १४७ १५०,
शोभनदेव ३५ १६४
शंकर राजा २३२ श्रेयांसजिन ७, १९३
शंकरपुर १४७ श्रेयास (राजा) ६०, २१२
शंख ६४ श्री श्रीमालकुल २० २४०
शंखजिनालय १८४ श्रीसोम ९४
शंखकूप ६४ श्रीभूति ९४
शांतिनाथ ३, ७, ८, ९, ६० १७८, श्रीसुन्दर ११८
१९२, १९४, २११, २१२, २१७ शुद्धदन्ती (नगरी) १०, ६१ २७
शांतिनाथ जिनालय ८ शूकर क्षेत्र ७१२
शंख राजर्षि ४२ शूलपाणि ६५
शांतिनाथ प्रतिमा २२२ श्वेताम्बर १०४ १०५
शेष (नाग) ३८