विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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वाल्वक (जनपद) १२३ विदेह (महाविदेह) ३
वालिमर्षि २१० विनमि २,७
वालिखिल्ल २ विमल ९४
वामुकि ३८,११६,२३८ विमलजिन १११,१९३
वासुदेव १८,२५ विदेह (जनपद) ७१
वासुपूज्य १४६,१४९,१९३,२२५ विमल (दडनायक) ३५
वासिष्ठ गोत्र १७० विमलवसति ३५
व्यास ऋषि ८७ विमलयश (राजा) १८३
व्यक्त (गणधर) १७०,१७१, विमलवाहन ९,५३,९१,९३
१७२ विमलसूरि १२६
विकटधर्म ९ विमलाचल १,४,५,२७, १२५,
विक्रमादित्य ७८,२०१,२०२, २०४
८८,२४२,१३१,१३४,३, विरचि ११७
विक्रमपुर १०१ विवाहवाटिका (गाँव) १४४
विक्रमसंवत् २०,६,९,१०,४१, विष्णुगुप्त १५७
१७६,२३३,२४८,३५,५१ विष्णुपद (गिरि) २२१
विजय ९४ विष्णुकुमार २१२
विजय (नृप) ७२ विश्वनाथ मन्दिर १६८
विजयघोष १६२ विश्वेश्वर १९३
विजयदेश १७० विश्वभूति ४१
विजय वाणणसी १६८ विश्रान्तिक तीर्थ ४१
विजय २३ ४८ विशाल शृंग १७
विद्यातिलकमुनि २१३ विहला (नदी) १६,
विद्यादेवी २३ वृहस्पति २१४
विद्यापाहुट १३ वीतभय (पत्तन) १९५
विनोतानगरी ५३ वीरजिन ५१,६२,६४,६५,
विष्णुकुमार ६०,९८,९९,१०० ६६,६७,१०५,११२,१४०,
१६०,१८३