विविध तीर्थ कल्प (आचार्य जिनप्रभ सूरि - प्राचीन भारतीय तीर्थ, ऐतिहासिक भूगोल व पुराविहार)
Vividha Tirtha Kalpa of Jinaprabha Suri
आचार्य जिनप्रभ सूरि (सम्पादक: मुनि जिनविजय) द्वारा
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(बिंव ५ पगल्या २०) ते मध्ये २, गुसारा १ मे बिंव १७ और एक
म चउवीसी ४, देवी ६, प्रतिमा ११, कुंड १, झरणो १; धर्मशाला
२, खेतपाल १, दिगंबरी का मंदर २१, दिगंबरी का तेरा पंथी का
धर्मशाला २, नोवतखानो १, तलाव १ ।
पालगांज सेहर १, जिसमे राज सुवर्ण सिंघ जिसका कुवर
डकेत सिंघ जिणके पास प्रतिमा १, सावलिया पार्श्वनाथ जी की
रहती है, धातु की प्रतिमा ४, पुरा ३, तालाव १, धर्मशाला २ ।
चंपानगर देहरा ३, वासुपूज्य जी का १, पार्श्वनाथ को १,
चौमुख को १, फेर १, दादाजी को खेतपाल ४, सासनदेवी १,
दिगम्बरी को १ ।
मगसुदाबाद अजीमगंज मध्ये देहरा ३, शिखरवन्ध देहरो १,
नेमिनाथ जी को पाषाण का बिंव ११, धातु का २१, सिद्धचक्र जी
३, विलोड की प्रतिमा २ । वासुपूज्य रो मंदर १, प्रतिमा ६,
नवपद जी सिद्धचक्र जी १, देवी ४, ऊपर चौमुख च्यार प्रतिमा
दादाजी का चरण २, खेतपाल ४, रामदेव १, हरुमान १, वगीचा
२ फूल का, ते मध्ये कूयो १, रथगर १, घडीखाणो १, पोसाल
वृहत् खरतरगच्छ की गंगा किनारै है । चिन्तामणि पार्श्वनाथ
प्रतिमा पाषाण की ७, धातु की १५, देवी १, माणभद्र १, उपर
चोमुख १, सीमन्धर जी का पदमप्रभु ना मन्दर १, प्रतिमा पाषाण
की ३, धातु की ७, देवी १, खेतपाल १, दादाजी रा पगल्या १,
उपासरे रंग विजयां को पहिलै पार ।
बालोचर मन्दर २, सभुनाथजी रो देहरो १, प्रतिमा पाषाण
की ७, धातु की १८, सिद्धचक्र जी १, देवी २, दादाजी का पगल्या
२, खेतपाल ३, नन्दर १, पार्श्वनाथ जी को पाषाण का बिंव
धातु का ११, देवी १, खेतपाल १, दादा जी रा पगल्या १ ।
माजनटोली देहरो १, विलोक की प्रतिमा ३, सिद्धचक्र जी १,