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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

विषय सूची
विषय पृष्ठ
१ भूमिका १
२ नारी महिमा ३
३ सती और शिव का दाम्पत्य प्रेम ४
४ श्रीकृष्ण जी का दाम्पत्य प्रेम १२
५ दाम्पत्य प्रेम और स्वर्ग १३
६ श्रीरामचन्द्र जी का आदर्श प्रेम १७
७ दाम्पत्य प्रेम की अद्भूत कथा २१
८ दाम्पत्य प्रेम का प्रभाव ३०
९ विवाह का उद्देश्य ३२
१० वेद शास्त्रो की आज्ञा ३४
११ दाम्पत्य प्रेम का अभाव ४४
१२ सीता और रावण का संवाद ५१

३ विषय सूची
१३ कीचक वध ५६
१४ कामशास्त्र ५९
१५ सावधान ६०
१६ कामशास्त्र का उद्देश्य ६१
१७ कामशास्त्र से क्या है ६१
१८ कामशास्त्र के ज्ञान की आवश्यकता ६२
पहला अध्याय
आनन्द मन्दिर
१९ आनन्द और सुख ६५
२० पूर्व जन्म और इस जन्म के शुभाशुभ कर्म ७२
२१ कामदेव चरित्र ७४
२२ रम्भा और शुकदेव मुनि ७५
२३ कामदेव और शिवजी ८२
दूसरा अध्याय
२४ कामशास्त्र और वैद्यक शास्त्र से रतिक्रिया विज्ञान
और गर्भ विधान ८५
२५ स्त्री के भेद ८८
२६ पद्मिनी स्त्री के लक्षण ८८
२७. चित्रणी स्त्री के लक्षण ८८
२८ शंखिनी स्त्री के लक्षण ८९

विषय सूची ३
२९ हस्तिनी स्त्री के लक्षण ८९
३० स्त्री के शरीर में अनंग का चढ़ाव उतार ९०
३१ अमृत और विष ९५
३२ चारों प्रकार के पुरुषों के लक्षण ९६
३३ मृग पुरुष के लक्षण ९६
३४ वृषभ पुरुष के लक्षण ९६
३५ शशक पुरुष के लक्षण ९७
३६ अश्व पुरुष के लक्षण ९७
स्त्री पुरुष सम्बन्ध
३७ पद्मिनी स्त्री और शशक पुरुष ९८
३८ चित्रणी स्त्री और मृग पुरुष ९८
३९ शंखिनी स्त्री और वृषभ पुरुष ९९
४० हस्तिनी स्त्री और अश्व पुरुष ९९
तीसरा अध्याय
ऋतुचर्या
४१ हेमन्त ऋतु का आहार विहार १०३
४२ हेमन्त ऋतु का स्नान १०५
४३ हेमन्त ऋतु का आहार १०६
४४ हेमन्त ऋतु के हानिकारक पदार्थ १०७
४५ शिशिर ऋतु का आहार विहार १०८

४ विषय सूची
४६ वसन्त ऋतु का आहार विहार ११२
४७ कफ नाशक उपाय ११३
४८ वसन्त ऋतु मे हानिकारक पदार्थ ११४
४९ ग्रीष्म ऋतु का आहार विहार ११९
५० ग्रीष्म ऋतु के हानिकारक आहार विहार १२१
५१ वर्षा ऋतु का आहार विहार १२१
५२ वर्षा ऋतु मे हानिकारक पदार्थ १२४
५३ शरद ऋतु का आहार विहार १२५
आवश्यक सूचना
५४ हेमन्त, शिशिर, वर्षा १२८
५५ वसन्त ऋतु १२८
५६ ग्रीष्म ऋतु १२८
५७ शरद ऋतु १२९
५८ ऋतुओ के अनुसार आहार विहार का सक्षिप्त
वर्णन १२९
५९ वात पित्त कफ का कोप और शान्ति १२९
चौथा अध्याय
६० दाम्पत्य कलह का कारण १३३
६१ योग्य जोड़े और योग्य सन्तान १३४
६२ जन्म पत्र आदि मिलाने का उद्देश्य १३५

विषय सूची ५
६३ कन्या का जन्म पत्र १३६
६४ लग्न फल विचार १३८
६५ कामशास्त्र आदि ग्रन्थो का मत १४०
६६ दाम्पत्य कलह का दूसरा कारण १४४
६७ वाल्यावस्था का बेमेल सम्बन्ध १४५
पाँचवा अध्याय
६८ आयुर्वेद और कामशास्त्र १४९
६९ स्त्री सम्भोग का अर्थ १५०
७० स्त्री सम्भोग का नियम १५०
७१ ऋतुविचार पूर्वक सम्भोग १५१
७२ वर्जित समय १५२
७३ दाम्पत्य विहार का योग्य स्थान १५३
७४ तात्पर्य १५४
७५ आरोग्यता और सम्भोग १५६
७६ वाजीकरण क्या है १५६
७७ धर्मशास्त्र और आयुर्वेद से ऋतुदान का समय १५७
७८ ऋतुधर्म का समय १६०
७९ ऋतुधर्म का बन्द होना १६०
८० स्त्रिया अधिक सम्भोग की इच्छुक नही सन्तान
की इच्छुक होती हैं १६३
८१ स्त्रियो का कामोद्दीपन १६४

६ विषय सूची

८२ मैथुनेच्छा की शान्ति १६६
८३ उचित प्रसंगके लक्षण १६७
८४ शुद्ध वीर्य की पहचान १६९
८५ स्त्री पुरुषों के रोगो की अधिकता का कारण १७०
८६ सन्तान के लिये सभोग की तैयारी १७२
८७ आनन्द दायक स्त्री प्रसंग १७३
८८ वीर्यपात के समय पति पत्नी की चेष्टा १७५
८९ गर्भधारण का समय १७६
९० गर्भाधान क्रिया १७८
९१ सहवास और गर्भाधान १७९
९२ कामशास्त्र सम्बन्धी पुस्तको का प्रभाव १८१
९३ ऋतुकाल का परिणाम १८३
९४ ऋतुकाल के पीछे सकोचन १८४

छठा अध्याय

९५ स्त्रियो की सभोग इच्छा १८७
९६ स्त्रियो की सभोग इच्छा कब पूरी होती है १८९
९७ सभोग योग्य स्त्री १९०
९८ संभोग के अयोग्य स्त्री १९२
९९ स्त्रिये का स्वप्न प्रसंग १९४
१०० स्त्रियो मे परस्पर रतिक्रिया का फल १९६
१०१ दुर्गन्धित योनिवाली स्त्रियां १९७

विषय सूची ७
१०२ पति दर्शन का महत्व १९८
सातवां अध्याय
१०३ सृष्टी अर मनुष्य जाति २०१
१०४ मनुष्य की नित्यप्रति की इच्छाएं २०२
१०५ पुरुष रोगो का कारण २०३
१०६ बुरे कर्मों से पुरुषेन्द्री की खराबियां २०६
१०७ मेदे की खराबियां २०६
१०८ रीढ़ की हड्डी के रोग २०७
१०९ मस्तिष्क की खराबियां २०८
११० बहुमैथुन २१०
१११ बहुमैथुन का परिणाम २१०
११२ सभोग के लिये अयोग्य पुरुष २१३
११३ आवश्यक सूचना २१४
११४ शीघ्रपात का कारण २१५
११५ पुरुषो का भ्रम ६१७
११६ पुरुषो की बड़ी भारी भूल २१९
११७ पुरुषो की समझ का उल्टा परिणाम २२३
११८ मर्दानगी के बदले नामर्दी का सर्टीफिकेट २२४
११९ बहुमैथुन से हानि २२४
१२० हस्तक्रिया से हानि २३०
१२१ क्षयरोग का विशेष कारण २३१

८ विषय सूची

आठवां अध्याय

१२२ अधिक विषय का मुख्य कारण २३५
१२३ शारीरिक और मानसिक निर्बलता की
अधिकता २३८
१२४ पुरुष रोगियो के विषय मे मेरा अनुभव २४४
१२५ सैकड़ा पीछे निन्नानवे पुरुष रोगी है २४५
१२६ वीर्यदोषवाले रोगियो के पत्र २४५
१२७ स्त्रियो की रोगी संख्या २४६
१२८ रोगो की उत्पत्ति २४७

नवां अध्याय

१२९ माता पिता के विचारो पर सन्तान का प्रभाव २५१
१३० योग्य सन्तान १५१
१३१ आरोग्यता और उत्तम सन्तान २५२
१३२ रतिक्रिया विज्ञान और उत्तम सन्तान २५५
१३३ पुरुष दोष तथा स्त्रियो के आहार विहार के
अनियम से उत्पन्न होने वाले स्त्री रोग २५८
१३४ सन्तान २५९
१३५ चौरासी आसन मनगढत है २५९
१३६ सावधान २६३
१३७ सन्तान पर दाम्पत्य प्रेम का प्रभाव २६५

विषय सूची ६
१३८ सन्तान पर माता पिता के रोगो का प्रभाव २७१
१३९ शुद्ध रज वीर्य से उत्तम सन्तान २७१
१४० सन्तान होने मे बाधक रोग २७१
दसवां अध्याय
१४१ पुरुषार्थ हीनता या नपुंसक्त्व २७५
१४२ नपुंसक पुरुष के लक्षण २७५
१४३ नपुंसकता के विशेष कारण २७६
१४४ वृद्धावस्था की नपुंसकता २७८
१४५ चिंता क्रोध और शोक से नपुंसकता २७९
१४६ अन्य कारणों से नपुंसकता २७९
१४७ नपुंसक होने का कारण २८०
१४८ आरोग्य और वलिष्ट सन्तान २८०
१४९ नपुंसको की उत्पत्ति २८१
१५० आसेव्य नपुंसक २८१
१५१ सौगन्धिक नपुंसक २८२
१५२ कुंभिक नपुंसक २८३
१५३ दूसरा कारण २८३
१५४ ईर्ष्यक नपुंसक २८४
१५५ स्त्री के नपुंसक होने का कारण २८५
१५६ दूसरी प्रकार की स्त्री नपुंसक २८६
१५७ नपुंसको की सम्भोग शक्ति २८७

१० विषय सूची
ग्यारहवां अध्याय
१५८ बालको के रोगो और मृत्यु की अधिकता का
कारण २९१
१५९ दूसरा कारण २९१
१६० तीसरा कारण २९१
१६१ चौथा कारण २९२
१६२ पांचवां कारण २९२
१६३ छठा कारण २९२
१६४ सातवा कारण २९३
१६५ आठवां कारण २९४
१६६ नवां कारण २९५
१६७ दशवां कारण २९५
१६८ ग्यारहवां कारण २९६
१६९ बारहवा कारण २९६
१७० तेरहवां कारण २९७
१७१ चौदहवां कारण २९७
१७२ पन्द्रहवा कारण २९८
१७३ सोलहवा कारण २९९
१७४ सत्रहवां कारण २९९
१७५ अठारहवां कारण ३००
१७६ उन्नीसवां कारण ३००

विषय सूची ११
१७७ बीसवां कारण ३०१
१७८ डकीसवां मुख्य कारण ३०१
बारहवाँ अध्याय
१७९ आरोग्यता ३०७
१८० आरोग्यता के लक्षण ३०८
१८१ मिथ्या आहार विहार ३०९
१८२ शरीर रक्षा ३११
१८३ ब्रह्मचर्य का सामान्य स्वरूप ३११
१८४ ब्रह्मचर्य के आठ प्रकार ३१२
१८५ ब्रह्मचर्य के अमूल्य गुण ३१३
१८६ प्राचीन काल मे ब्रह्मचर्य ३१३
१८७ ब्रह्मचर्य के अभाव से हानि ३१५
१८८ प्राचीन विद्याभ्यास का ढंग ३१७
१८९ आजकल का विद्याभ्यास ३१८
१९० पढ़ानेवाला कैसा चाहिये ३१९
१९१ प्राचीन विवाह क्रम ३२१
१९२ मेरा तजुरबा ३२४
१९३ सन्तानहीन स्त्रियों का इलाज ३२६
तेरहवां अध्याय
१९४ स्त्री की जनेंद्री ३२९

१२ विषय सूची

१९५ स्त्री की जनेन्द्री तथा अन्य अवयव ३३३
१९६ स्त्री की नपुंसकता उत्तेजना शक्ति का नष्ट होजाना ३४३
चौदहवां अध्याय
१९७ रतिक्रिया का प्राकृतिक नियम और उत्तम सन्तान ३५१
१९८ गर्भाधान के समय की स्थिति ३५४
१९९ गर्भधारण के लक्षण ३५५
२०० गर्भ रक्षा ३५६
पन्द्रहवां अध्याय
२०१ गर्भधारण ३५९
२०२ स्त्रियों के जनेन्द्री दोष ३६०
२०३ योनि और गर्भाशय ३६१
२०४ आरोग्यता की दशा मे ३६२
२०५ मासिकधर्म के समय गर्भाशय का खुला हुआ मुख ३६३
२०६ पुत्र और कन्या के गर्भस्थिति का कारण ३६४
२०७ गर्भाशय मे कन्या व पुत्र का स्थान ३६५
२०८ गर्भ मे दो बच्चे होने का कारण ३६६
२०९ विपरीत आसन से गर्भाशय की हानि ३६८
२१० गर्भाशय का आगे का हिस्सा ३६८
२११ गर्भाशय का पीछे का हिस्सा ३६९
२१२ गर्भाशय के बन्धन ३७०

विषय सूची १३
२१३ गर्भाशय के रोग ३७१
२१४ गर्भाशय की गांठ ३७२
२१५ गर्भाशय की भीतरी गांठ ३७२
२१६ गर्भाशय से गांठ ( योनिकन्द ) ३७३
२१७ गर्भाशय के मुंह पर गांठ ३७४
२१८ गर्भाशय का मस्सा ३७५
२१९ भीतरी मस्सा ३७६
२२० गर्भाशय का भीतरी का मस्सा ३७७
२२१ भीतरी मस्सा के सम्बन्ध में ३७८
२२२ स्त्रियो की रोग परीक्षा ३८०
२२३ गर्भाशय का टेढ़ा होजाना ३८०
२२४ गर्भाशय का मुख टेढ़ा होना ३८२
२२५ अनियम रतिक्रिया करनेवालो सावधान ३८४
२२६ गर्भाशय का योनि की दीवार में चिपटा मुख ३८५
२२७ दाम्पत्य जीवन को दुखमय बनाने वाली मनगढ़ंत
पुस्तको से सचेत रहिये ३८६
२२८ गर्भाशय के मुख की सूजन ३८७
२२९ विपरीत रति से सैकड़ा पीछे ९९ स्त्रिया रोगी हैं ३८८
२३० गर्भाशय का खुला मुख ३९०
२३१ ऋतुस्नाता स्त्री के पति दर्शन का कारण ३९१
२३२ विपरीत आसन से गर्भाशय भ्रंस ३९३
२३३ गर्भाशय का बाहर निकल आना ३९४

१४ विषय सूची
२३४ पति के व्यभिचार से पत्नी के गर्भाशय दोष - ३९६
२३५ योनि के छाले फुंसियां ३९७
२३६ गर्भाशय के मुख पर गर्मी रोग ३९८
२३७ योनि की गांठ ३९९
२३८ गर्भाशय के मुख पर सम्सा ४०१
२३९ गर्भाशय के मुख पर खराबी ४०२
२४० मासिकधर्म के समय तथा गर्भ धारण के लिए शुद्ध ४०३
गर्भाशय का मुख
२४१ वद् मुह गर्भाशय ४०४
२४२ गर्भाशय का भीतर को झुका हुआ मुख ४०५
२४३ मेद् रोग ( चर्बी का वढ जाना ) ४०६
२४४ जरूरी बात ४०८
सोलहवाँ अध्याय
२४५ अनियम आहार विहार से स्त्रियो के अन्य रोग ४११
२४६ वातज योनि रोग ४११
२४७ पित्तज योनि रोग ४१२
२४८ कफज योनि रोग ४१३
२४९ सन्निपातक योनि रोग ४१३
२५० रक्त पित्तज योनि रोग ४१४
२५१ अरजस्का योनि ४१४
२५२ अचरणा योनि ४१५

विषय सूची १५
२५३ अति चरणा योनि ४१५
२५४ प्राक चरणा योनि ४१६
२५५ उपप्लुता योनि ४१७
२५६ परिप्लुता योनि ४१७
२५७ उदावृत्ता योनि ४१८
२५८ उदावर्त्तिनी योनि ४१९
२५९ कर्णिनी योनि ४१९
२६० पुत्रघ्नी योनि ४१९
२६१ अन्तर्मुखी योनि ४२०
२६२ सूचीमुखी योनि ४२१
२६३ शुष्का योनि ४२२
२६४ वामिनी योनि ४२४
२६५ वन्ध्या योनि ४२४
२६६ महा योनि ४२५
२६७ योनि सकोचन ४२६
२६८ अनियम सभोग और पुरुष रोगो की उत्पत्ति ४२८
२६९ वीर्य के दूषित होने का कारण ४३०
२७० याद रखने की बात ४३१
२७१ अनुचित मैथुन से हानि ४३२
२७२ आनन्द वर्द्धक प्रसग ४३४
२७३ बाल विवाह ४३६
२७४ बेमेल विवाह ४३७

१६ विषय सूची
〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰〰
२७५ बेमेल विवाह का भयंकर परिणाम ४३८
२७६ सन्तान हीन स्त्रियों का शर्तिया इलाज ४३९
२७७ पति की अवस्था कम होने का परिणाम ४४१
२७८ रतिक्रिया के योग्य स्त्री की अवस्था ४४५
२७९ छोटा पति बड़ी पत्नी ४४९
२८० सम्भोग और निर्बलता ४५२

सत्रहवां अध्याय

२८१ बाबा का विवाह ४५७
२८२ वृद्ध विवाह के भेद ४६१
२८३ गर्भपात और मृतगर्भों की उत्पत्ति ४६३

अठारहवां अध्याय

२८४ स्त्री का रति सुख ४६७
२८५ रति सुख का आनन्द ४६८
२८६ गर्भवती से रति करने का गर्भ पर बुरा प्रभाव ४६८
२८७ गर्भाधान क्रिया अर्थात् सम्भोग ठीक न होने से स्त्रियों का
रोगी होना ४७३
२८८ प्रेम सम्भोग और आरोग्यता ४७३
२८९ पति की निर्बलता सम्भोग और रोग ४७४
२९० याद रखने की बात ४७५
२९१ स्त्रियां वन्ध्या क्यों होती हैं ४७६

विषय सूची १७
२९२ स्त्रियों के अडकोष ४७६
२९३ बन्ध्या स्त्रियो का शर्तिया इलाज ४७७
२९४ सन्तानहीन स्त्रियां निराश न हो ४७७
२९५ पुरुष रोगियों को सूचना ४७७
२९६ मूढ़ गर्भोँ की उत्पत्ति ४७८
२९७ गर्भोँ की स्थिति ४७९
उन्नीसवाँ अध्याय
२९८ गर्भिणी और गर्भ को हानि पहुंचने का कारण ४९९
२९९ पति पत्नी की प्रेम वार्त्ता ५००
३०० पति का प्यार ससार के बहुमूल्य आभूषणो
से भी बढ़कर है ५००
३०१ जवानी और बुढ़ापा ५०१
३०२ प्रेम की प्रार्थना ५०२
३०३ अनुभव की बात ५०४
बीसवाँ अध्याय
यमराज की कचेहरी
३०४ अत्याचारी और व्यभिचारी पतियो का न्याय ५०७
३०५ अत्याचारी पति को यमराज का दण्ड ५०८
३०६ पर स्त्री गमन का फल ५०८

१८ विषय सूची
३०७ दुष्ट पुरुषो से ठगीगई परपुरुषरता स्त्री को
यमराज का दण्ड ५०९
३०८ अपने सुख और आराम के लिये सौतेली सन्तान
को कष्ट देने का फल ५०९
३०९ पति का निरादर ५०९
भूल सुधार
पाठक इस तरह सुधार कर पढ़ें
अशुद्ध शुद्ध
पृष्ठ ९१ मे—
एकादशी को कपोल मे एकादशी को गले मे
द्वादशी को गले मे द्वादशी को गालो मे
तेरस को गाल मे तेरस को होठ मे
पृष्ठ २६३ पंक्ति १६ मे
बाद स्खलित होगी पहले स्खलित होगी
चित्र पृष्ठ १९६ मे
वर्षा वहार पृ० १९१ वर्षा वहार पृ० १२२
कहीं कहीं कुछ प्रूफ की और भी भूले रह गई है पाठक
क्षमा करे । अगले संस्करण मे ठीक कर दी जायगी ।

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