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विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

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विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ५०७
यमराज की कचहरी
अत्याचारी और व्यभिचारी पतियों का न्याय
अत्याचारी और व्यभिचारी पति अपनी निरपराध पतियो
पर जो अत्याचार करते हैं उन्हे अपनी कामाग्नि शान्ति की
मशीन समझकर उनके साथ अन्याय करते हैं अनेक प्रकार
के विपरीत आसन और अनियम रति करके उन्हे रोगी
बना देते हैं और फिर कुछ परवाह नहीं करते वे रोगो मे ग्रसित
हो दुःखमय जीवन व्यतीत करती हैं तथा सन्तान हीन ( वन्ध्या )
हो रोरो कर मृत्यु के दिन गिना करती हैं इन्ही कष्टो मे ही जब
जीवन लीला समाप्त कर जाती हैं तब वे शक्तिहीन होने पर भी
अपनी विषय लोलुपता के कारण दूसरा विवाह कर लेते हैं।
बहुतेरे अपनी विवाहित स्त्री के रहते हुए भी उससे तृप्त न
होकर उसका निरादर कर वेश्यागामी होजाते हैं तथा पर स्त्री
को बहका कर धमका कर लालच दिखाकर व्यभिचार करते हैं
उनको इस अत्याचार और व्यभिचार का फल स्वरूप अनेक
प्रकार के रोगों में ग्रसित हो कष्ट से जीवन व्यतीत करना पड़ता
है और उन्हें गरमी सुजाक प्रमेह नपुंसकता आदि रोग घेर लेते हैं
जिससे वे रोरो कर मौत के दिन गिना करते हैं इस प्रकार इस
मनुष्य शरीर में उन्हें पत्नी पर अत्याचार अन्याय और पर स्त्री
गमन वेश्यागमन की सजा रोग रूप में मिलती है ।