सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

विवाह विज्ञान और कामशास्त्र (दाम्पत्य मनोविज्ञान, शारीरिक-मानसिक सामंजस्य एवं सम्पूर्ण विवाह विज्ञान)

Vivah Vigyan Aur Kam Shastra: Dampatya Manovigyan evam Vaidik Vivaha

विवाह विज्ञान शोध पीठ द्वारा

DevanagariHindipublished704 पृष्ठ

पृष्ठ 632, कुल 704 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 632

विवाह विज्ञान-कामशास्त्र ४४६
छोटा पति बड़ी पत्नी
पत्नी की अवस्था अधिक और पति की कम होने से दोनो
का जीवन दुःखमय व्यतीत होता है, क्योंकि शास्त्रकारो ने
बतलाया है :-
बालेति गीयते नारी यावद्वर्षाणि षोडश ।
ततस्तु तरुणी ज्ञेया द्वात्रिंशद्वत्सरावधि ॥
तदूर्ध्वमधिरूढा स्यात्पंचाशद्वत्सरावधि ।
वृद्धा तत्परतोज्ञेया सुरतोत्सववर्जिता ॥
अर्थात्—सोलह वर्ष तक स्त्री बाला कहलाती है। इसके
बाद बत्तीस वर्ष की अवस्था तक तरुणी अर्थात् जवान रहती है
बत्तीस वर्ष के बाद पचास वर्ष तक प्रौढ़ा और पचास वर्ष के
बाद स्त्री वृद्धा हो जाती है। वृद्धा स्त्री सम्भोग के लिये वर्जित है।
वृद्धा के साथ प्रसग करने से आयु कम होतो है।
जिस स्त्री की अवस्था अट्ठाइस वर्ष की और पति की
चौदह वर्ष. की; जैसे कि अनेक जोड़े देखने मे आते हैं। इस
हिसाव से स्त्री की बाल अवस्था तो व्यतीत होगई। अब बत्तीस
वर्ष की अवस्था जब स्त्री की हुई अर्थात् बत्तीस वर्ष की अवस्था
तक स्त्री तरूण ( जवान ) रही किन्तु तब पति की अवस्था
अठारह वर्ष की हुई। देखिये अभी पति स्त्री प्रसग करने के योग्य
नहीं हुआ और स्त्री की जवानी भी बिदा होना चाहती है। स्त्री
२९